काठमांडू।(यशोदा श्रीवास्तव) भारत सीमा के निकट स्थित पालपा जिले की तिनाउ नदी भारतीय नागरिकों के लिए मौत का कुंड साबित हो रही है। इस नदी के समीप स्थित सिद्ध बाबा के मंदिर पर माथा टेकने यूपी बिहार सहित भारत के अन्य शहरों से भारी संख्या में लोग आते हैं। या यूं कहिए कि जो भी भारतीय नेपाल के पोखरा में घूमने जाते हैं, वे लगभग सभी लोग इस स्थल पर रुक कर कुछ समय जरूर बिताना चाहते हैं। पोखरा जाने का मुख्य मार्ग यही है।
दो दिन पूर्व नेपाल के सीमावर्ती जिला सिद्धार्थनगर के चार युवक उक्त मंदिर के दर्शनार्थ गए हुए थे। इस मंदिर पर जाने वाले अधिकांश लोग तैराकी अथवा स्नान के लिए नदी में उतर ही जाते हैं बिना यह जाने की नदी की गहराई और उसका तेज बहाव कितना है। सिद्धार्थनगर के इन चार युवकों ने भी यही गलती की और वे नदी में मस्ती करने उतर पड़े। नतीजा यह हुआ कि सभी युवक देखते ही देखते डूबने लगे। गनीमत थी कि स्थानीय लोगों ने उन युवकों को डूबते हुए देख लिया और वे अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में कूद पड़े। स्थानीय लोग तीन की जान बचाने में कामयाब हो गए जबकि 25 वर्षीय सौरभ रस्तोगी नामक युवक नदी में लापता हो गया। नेपाल पुलिस के जवान और गोताखोर दो दिन की खोजबीन के बाद शनिवार को उसका शव बरामद कर पाए।
सवाल केवल एक युवक की मौत का नहीं है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार के साथ मौके पर गए सिद्धार्थनगर नगरपालिका के अध्यक्ष गोविंद माधव को स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इस नदी में नहाते समय आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती जिसमें अधिकांशतः भारतीय नागरिकों की जान चली जाती है। लोगों ने जानकारी दी कि बहुत कम ऐसा होता है कि लोगों को बचा पाया जाता है या उनकी डेड बॉडी बरामद हो पाती है। चौंकाने वाली बात यह है कि जैसा कि लोगों ने बताया कि पिछले दस वर्षों में करीब सौ से अधिक विदेशी नागरिकों की जान इस नदी में डूबने से हुई है जिनके शव नहीं बरामद हो पाए। ऐसे लोगों में ज्यादातर भारतीय नागरिक हैं जो नदी में डूब कर अपनी शिनाख्त तक नहीं छोड़ पाए।
सिद्धार्थनगर नगरपालिका के अध्यक्ष गोविंद माधव ने भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो इसके लिए नेपाल के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर चिन्हित मौत के कुंड को तार के बाड़ से घेरेबंदी के साथ वहां सुरक्षा की दृष्टि से जल पुलिस तैनात करने का अनुरोध किया है।
नेपाल का तिनाउ नदी: दस सालों में सौ से अधिक विदेशी नागरिकों के मौत की खबर, अधिकांश भारतीय





