नेपाल-बांग्लादेश तक हो रही सप्लाई; बाजार में 40% तक फर्जी दवाओं की आशंका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में सामने आया है कि राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से तैयार होकर आने वाली नामी कंपनियों की नकली दवाएं उत्तर प्रदेश की प्रमुख दवा मंडियों के जरिए न केवल प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंच रही हैं, बल्कि नेपाल और बांग्लादेश तक भी सप्लाई की जा रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और प्रदेश को नकली दवाओं का सबसे बड़ा बाजार बना चुका है।
एफएसडीए की जांच में पता चला है कि नकली दवाओं की खेप पहले आगरा और लखनऊ की थोक दवा मंडियों में पहुंचती है। इसके बाद इन्हें कानपुर, वाराणसी समेत अन्य जिलों और छोटे शहरों के मेडिकल स्टोरों तक भेजा जाता है। कई मामलों में दवाओं की आपूर्ति कोरियर, निजी बसों और बस अड्डों के आसपास बने गोदामों के माध्यम से भी की जाती है।
नेपाल और बांग्लादेश तक फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि महराजगंज और सिद्धार्थनगर के सीमावर्ती क्षेत्रों से नकली दवाओं की खेप नेपाल भेजी जा रही है। वहीं वाराणसी के रास्ते बिहार और पश्चिम बंगाल तक दवाएं पहुंचाई जाती हैं, जहां उनकी पैकेजिंग बदलकर बांग्लादेश भेजे जाने की आशंका है। एफएसडीए अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क की कई कड़ियों की पहचान कर ली गई है और लगातार कार्रवाई की जा रही है।
20 करोड़ की नकली दवाएं जब्त, 50 से अधिक मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई
एफएसडीए ने पिछले एक महीने के दौरान विशेष अभियान चलाकर करीब 20 करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त की हैं। इस मामले में 50 से अधिक मेडिकल स्टोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर प्रदेश के कई जिलों में लगातार छापेमारी जारी है।
40 फीसदी तक बाजार में नकली दवाओं की आशंका
दवा कारोबार से जुड़े लोगों का अनुमान है कि प्रदेश के बाजार में करीब 40 प्रतिशत तक नकली दवाएं मौजूद हो सकती हैं। जांच के दौरान कई दवाओं के नमूनों में सक्रिय औषधीय तत्व (Active Ingredient) बेहद कम या न के बराबर पाया गया। अधिकारियों को यह भी आशंका है कि एक्सपायर होने वाली दवाओं पर नया रैपर चढ़ाकर उन्हें दोबारा बाजार में बेचा जा रहा है, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
एफएसडीए की कार्रवाई जारी
एफएसडीए का कहना है कि नकली दवाओं के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। जांच एजेंसियां सप्लाई चेन से जुड़े थोक विक्रेताओं, गोदाम संचालकों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि दवा खरीदते समय बिल अवश्य लें और संदिग्ध दवाओं की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
फैक्ट फाइल
- प्रदेश में थोक दवा दुकानों की संख्या: लगभग 60 हजार
- फुटकर मेडिकल स्टोर: करीब 1.05 लाख
- प्रदेश में प्रतिदिन दवा कारोबार: लगभग 100 करोड़ रुपये
- देश के दवा बाजार में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी: करीब 25 प्रतिशत
- प्रमुख दवा मंडियां: लखनऊ, आगरा, वाराणसी और कानपुर
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