Rohit Pandey
अमृत उजाला
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2026। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को जोरदार राजनीतिक टकराव और विपक्षी हंगामे के साथ हुई। सत्र के पहले ही दिन लोकसभा और राज्यसभा में बार-बार व्यवधान देखने को मिला और दोनों सदनों की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब की मांग करता रहा। स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने की बात कही गई।
मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे और मीडिया को संबोधित किया। इसके बाद जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ने के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा। राज्यसभा में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही, हालांकि सदन में नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने समेत कुछ औपचारिक कार्यवाही पूरी की गई।
विपक्ष ने तय की रणनीति, सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांगने की तैयारी
सत्र शुरू होने से पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में इंडिया ब्लॉक के फ्लोर नेताओं की अहम बैठक हुई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने और संसद में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर रणनीति तैयार की गई।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, गौरव गोगोई, जयराम रमेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, सुप्रिया सुले, सौगत राय, सागरिका घोष, संजय राउत, महुआ माजी, जॉन ब्रिटास और पी. संतोष कुमार समेत विपक्षी दलों के कई नेता शामिल हुए।
विपक्ष ने संकेत दिया कि वह राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के आरोप, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था, इथेनॉल मिश्रण नीति समेत कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा मामले की स्वतंत्र जांच और हिसाब सार्वजनिक किए जाने की मांग उठाई है।
पेपर लीक के मुद्दे पर भी विपक्ष सरकार पर आक्रामक दिखाई दिया। मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि 2014 से अब तक बड़ी संख्या में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। विपक्ष ने इस मामले को युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए केंद्र सरकार को संसद में घेरने की रणनीति बनाई है।
अखिलेश यादव का सरकार पर हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सरकार पर संवेदनशील मुद्दों को लेकर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि छात्र और युवा अपनी समस्याओं को लेकर सामने आए हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।उन्होंने श्रद्धांजलि और संवेदना से जुड़े मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना करते हुए इसे सत्ता का ‘अहंकार’ करार दिया।
लोकसभा में विधेयक पेश होने के दौरान भी हंगामा
लोकसभा में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित एक विधेयक पेश किए जाने के दौरान भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। लगातार शोर-शराबे और विरोध के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। पहले कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया और इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं होने पर कई बार स्थगन की घोषणा करनी पड़ी।राज्यसभा में भी विपक्षी सदस्यों के विरोध के कारण कार्यवाही बाधित हुई और सदन को अलग-अलग समय के लिए स्थगित किया गया।
राज्यसभा में नए सदस्यों ने ली शपथ
हंगामे के बीच राज्यसभा में नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण भी हुआ। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने नए सदस्यों को सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई।
शपथ लेने वाले सदस्यों में गुजरात से भाजपा के मुकेशभाई जे. राठवा, कर्नाटक से कांग्रेस के पवन खेड़ा, मध्य प्रदेश से भाजपा के महेश केवट, मेघालय से एनपीपी के जेम्स पांगसांग कोंगकल संगमा, मिजोरम से खियांगते ललतलुआगकिमा, राजस्थान से भाजपा के सतीश पूनिया और पश्चिम बंगाल से प्रकाश चिक बराइक, सुष्मिता देव तथा सुखेंदु शेखर राय शामिल रहे।
दिवंगत पूर्व सांसदों को दी गई श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में पूर्व सांसदों और दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि दी। इनमें नादेंदला भास्कर राव, ओमवती देवी, सुधांशु सील, मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी, के.पी. धनपालन और प्यारे लाल संखवार सहित अन्य नाम शामिल रहे।
राज्यसभा में भी पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और उनके संसदीय योगदान को याद किया गया।
टीएमसी की अंदरूनी लड़ाई की गूंज संसद परिसर तक
मानसून सत्र के पहले दिन तृणमूल कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा भी संसद परिसर में रही। महुआ मोइत्रा ने कथित तौर पर पार्टी छोड़ने वाले 20 सांसदों पर तीखा हमला किया और उन्हें ‘गद्दार’ बताया। उन्होंने इन सांसदों की स्थिति और सदन में बैठने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
वहीं रचना बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में अपने साथ आए सांसदों के राजनीतिक भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख जताया और दावा किया कि आने वाला संसद सत्र उनकी टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
पहले दिन ही सरकार बनाम विपक्ष की सियासी जंग तेज
मानसून सत्र के पहले दिन जिस तरह दोनों सदनों में लगातार हंगामा और स्थगन देखने को मिला, उससे संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है। विपक्ष ने जहां जनहित, शिक्षा, पेपर लीक और कथित वित्तीय अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी की है, वहीं सरकार की कोशिश विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की रहेगी।
फिलहाल, पहले दिन लगातार व्यवधान के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही चौथी बार स्थगित होने से संसद का कामकाज प्रभावित हुआ। दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे फिर शुरू होने की बात कही गई है।







