मांगें नहीं मानीं तो कोर्ट और आंदोलन का रास्ता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की सेवाओं को ऑटो अप्रूवल (स्वतः स्वीकृति) मोड पर लागू करने की तैयारी के विरोध में अधिकारियों और कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को राजधानी लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेशभर से आए परिवहनकर्मियों ने नई व्यवस्था का विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन के साथ न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
दरअसल, शासन वाहनों के पंजीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण समेत विभिन्न सेवाओं को ऑटो अप्रूवल प्रणाली के तहत संचालित करने की तैयारी कर रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने पर आवेदकों को आरटीओ कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी और कई सेवाएं स्वतः स्वीकृत हो जाएंगी। इस विषय पर शासन स्तर पर सोमवार को समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित है।
इधर, उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ की प्रांतीय वार्षिक आमसभा में कर्मचारियों ने नई व्यवस्था पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत दस्तावेजों के सत्यापन और स्वीकृति का अधिकार आरटीओ कार्यालय के पास ही रहना चाहिए। यदि यह अधिकार समाप्त किया जाता है तो भविष्य में न्यायिक मामलों में आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए।
प्रांतीय महामंत्री आशुतोष तिवारी ने कहा कि यदि कर्मचारियों की जायज मांगों पर नियमानुसार विचार नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा। वहीं उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग स्टेनोग्राफर संघ के अध्यक्ष अरुण यादव ने शासन से नई व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की अपील की।
बैठक में कर्मचारियों ने विभाग से जुड़ी अन्य लंबित मांगें भी उठाईं। उन्होंने वर्षों से लंबित एश्योर्ड करियर प्रमोशन (एसीपी) मामलों का निस्तारण, यात्री कर एवं माल कर अधिकारियों के रिक्त पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरने तथा लिपिक संवर्ग के पुनर्गठन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग की। कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से लंबित इन मामलों के कारण विभागीय कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।







