भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, प्राथमिक उपचार और सीपीआर का दिया गया प्रशिक्षण, संवेदनशील पुलिसिंग पर रहा जोर
मथुरा। ब्रज की पावन नगरी में सावन मास के दौरान आयोजित होने वाले ऐतिहासिक राजकीय मुड़िया पूनों मेला-2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मथुरा पुलिस ने गोवर्धन स्थित राधे श्याम सेवा सदन में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की, जिसमें पुलिसकर्मियों को मेला ड्यूटी से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सुरेश चंद्र रावत ने की। उन्होंने पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुचारु यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील पुलिसिंग के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेला ड्यूटी के दौरान प्रत्येक पुलिसकर्मी को पूरी जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि भीड़ प्रबंधन के दौरान संयम, धैर्य और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत ने कहा कि भीड़ को केवल नियंत्रित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी नियमन भी आवश्यक है, जिससे मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके।
प्रशिक्षण कार्यशाला में समाजशास्त्री डॉ. मधु त्यागी ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार पर जोर दिया। वहीं मनोवैज्ञानिक डॉ. पूनम तिवारी ने भीड़ के मनोविज्ञान को समझाते हुए पुलिसकर्मियों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में शांत रहकर प्रभावी ढंग से स्थिति संभालने के तरीके बताए।
इसके अलावा डॉ. नेहा चौधरी ने प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की जानकारी दी, जबकि डॉ. अमित कश्यप ने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का लाइव प्रदर्शन कर आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मुड़िया पूनों मेले में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सुचारु आवागमन सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में गोवर्धन महाराज की 21 किलोमीटर परिक्रमा कर सकें।







