यूपी राज्यसभा चुनाव: भाजपा-सपा में क्रॉस वोटिंग के आसार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब दिलचस्प होता जा रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) कम संख्या में विधायक होने के बावजूद तीसरा प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। सपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीसरे प्रत्याशी का नाम तय कर लिया है और नामांकन की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। हालांकि, पार्टी भाजपा के प्रत्याशियों और उनकी संख्या सामने आने का इंतजार कर रही है।
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होगा, जबकि नामांकन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर है। ऐसे में मंगलवार को तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर अधिकतम 393-394 वोट पड़ने की संभावना है।
सपा पहले ही दो प्रत्याशी मैदान में उतार चुकी है। इनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह के कंसल्टेंट धनराज नाथवानी शामिल हैं। मौजूदा समीकरण में यदि सपा दो और भाजपा आठ प्रत्याशियों को मैदान में रखती है तो सभी 10 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं। लेकिन किसी भी दल की ओर से अतिरिक्त प्रत्याशी उतारे जाने पर मतदान जरूरी हो जाएगा।
तीसरे प्रत्याशी के लिए पांच अतिरिक्त वोटों का दावा
राज्यसभा चुनाव में एक प्रत्याशी को जीत के लिए 36 मतों की जरूरत होगी। सपा का दावा है कि उसके मौजूदा समर्थक विधायकों की संख्या के आधार पर तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए उसे करीब पांच अतिरिक्त मतों की जरूरत पड़ेगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन अतिरिक्त मतों के लिए सत्ताधारी गठबंधन के कुछ विधायक उसके संपर्क में हैं।
सपा नेतृत्व का मानना है कि तीसरा प्रत्याशी उतारने की स्थिति में मुकाबला सीधे संख्या बल के बजाय रणनीति और क्रॉस वोटिंग पर निर्भर हो सकता है। भाजपा और सपा दोनों खेमों में कुछ विधायकों के पाला बदलकर मतदान करने की अटकलें भी तेज हैं।
भाजपा के कदम पर टिकी सपा की रणनीति
सपा सूत्रों के मुताबिक तीसरे प्रत्याशी का नामांकन पत्र तैयार है। भाजपा अपने कितने प्रत्याशी उतारती है और उनके नाम क्या होते हैं, इसके बाद सपा अपने तीसरे उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा करेगी। पार्टी के पत्ते सोमवार या फिर नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को खुल सकते हैं।
इस चुनाव में एक अतिरिक्त प्रत्याशी उतरने से निर्विरोध निर्वाचन की संभावना खत्म हो जाएगी और मतदान के जरिए विधायकों की वास्तविक पसंद का परीक्षण होगा। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए क्रॉस वोटिंग रोकना बड़ी चुनौती होगी।



















