निलंबन से लेकर फैसले रद्द करने तक की मांग
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध है। याचिकाओं में CEC को अंतिम सुनवाई तक कार्य करने से रोकने, चुनाव आयोग के कुछ कथित एकतरफा फैसलों को निरस्त करने और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। पीठ राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
CEC को निलंबित करने की मांग
राकेश कुमार सिंह की याचिका में मांग की गई है कि मामले की अंतिम सुनवाई होने तक ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में कार्य न करें। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग का काम दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत राय के आधार पर चलाया जाए।
वहीं, शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में CEC और कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक कर्तव्य के कथित उल्लंघन को लेकर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। याचिका में 2023 के कानून की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग में मतभेद की स्थिति में बहुमत का निर्णय लागू होता है।
एकतरफा फैसलों और बदलावों पर सवाल
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने ऐसे अधिकारों का व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल किया, जो कानून के अनुसार पूरे चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। याचिकाओं में ऐसे फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई है, जिन्हें कथित तौर पर दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना लागू किया गया।
SIR को लेकर भी उठाए गए सवाल
याचिका में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि किसी संस्था में विचारों और टिप्पणियों में अंतर होना सामान्य प्रक्रिया है और आयोग की ओर से जारी सभी आदेश कानूनी रूप से वैध हैं।
फॉर्म-6 में बदलाव का भी मामला
याचिका में मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलावों पर भी सवाल उठाया गया है। आरोप है कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से फॉर्म में पूर्वजों की जानकारी और पिछले SIR से जुड़ी जानकारी जैसी शर्तें जोड़ी गईं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन बदलावों के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इन आरोपों और मांगों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा।





















