SIR पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उन्हें पद से हटाकर अंतरिम व्यवस्था करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े फैसलों को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि SIR से संबंधित करीब 14 फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों का रिकॉर्ड अदालत के सामने मंगाने और मामले की जांच होने तक CEC को उनके पद पर काम करने से रोकने की मांग की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पहले चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने आने दिया जाए। यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि किसी फैसले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ या फैसला आवश्यक सहमति के बिना लिया गया, तो अदालत उस फैसले पर रोक लगाने या उसे कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित करने पर विचार कर सकती है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कहा कि 2023 के नए कानून के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा दी गई है और आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े फैसलों में दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं ली गई।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि आयोग से अपेक्षा की जाती है कि वह सहमति से निर्णय ले, लेकिन यदि सहमति नहीं बनती तो कानून के अनुसार बहुमत से भी फैसला लिया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि अभी याचिकाकर्ताओं के आरोप मुख्य रूप से मीडिया में आई खबरों पर आधारित हैं और रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
सुनवाई के दौरान दिल्ली में SIR और फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलाव का मुद्दा भी उठा। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि पूरा रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखा जाएगा कि बदलाव किसके स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किए गए।
याचिकाकर्ता की ओर से CEC को अंतरिम रूप से निलंबित करने की मांग पर अदालत ने पूछा कि ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया कौन संचालित करेगा। जवाब में कहा गया कि बाकी दो चुनाव आयुक्त चुनाव करा सकते हैं।
अदालत ने फिलहाल CEC को निलंबित करने की मांग स्वीकार नहीं की। पीठ ने कहा कि पहले चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब आने दिया जाए। इसके बाद रिकॉर्ड के आधार पर यह तय किया जाएगा कि SIR से जुड़े फैसलों में कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।





















