लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को बताया है कि वह जानलेवा चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नया कानून लाने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित कानून में चाइनीज मांझे से घायल होने वाले लोगों को मुआवजा देने का भी प्रावधान किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रस्तावित कानून का नाम ‘उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री एवं उपयोग पर प्रतिबंध) अधिनियम’ रखा जा सकता है। इस कानून का उद्देश्य घातक चाइनीज मांझे के अवैध कारोबार और इसके उपयोग पर सख्ती से रोक लगाना है।
ऑनलाइन बिक्री पर भी अदालत की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि चाइनीज मांझा अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। इस पर हाईकोर्ट ने पक्षकारों के अधिवक्ताओं को इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए।
खंडपीठ ने सरकार से कहा कि प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और अगली सुनवाई से पहले इस दिशा में ठोस प्रगति अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
पुलिस अधिनियम में संशोधन पर भी विचार
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि चाइनीज मांझे के अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस अधिनियम में संशोधन पर भी विचार किया जा रहा है। हाल ही में अवैध व्यापार के खिलाफ विशेष प्रवर्तन अभियान भी चलाया गया है।
2018 की जनहित याचिका पर सुनवाई
यह मामला वर्ष 2018 में अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका और उससे संबंधित अन्य याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता ने राज्य में चाइनीज मांझे के आयात, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
व्यापारियों ने भी रखा पक्ष
सुनवाई के दौरान पारंपरिक पतंग और सूती मांझा कारोबार से जुड़े व्यापारियों की ओर से यह भी कहा गया कि चाइनीज मांझे के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कई बार पारंपरिक एवं सुरक्षित पतंग सामग्री भी जब्त कर ली जाती है, जिससे वैध व्यापार प्रभावित होता है। इस पर भी अदालत ने संबंधित पक्षों के तर्कों पर विचार करने की बात कही।






