Vande Mataram Bill: संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को वंदे मातरम् से जुड़ा अहम विधेयक लोकसभा से भी पारित हो गया। इससे एक दिन पहले, 29 जुलाई को राज्यसभा ने इसे मंजूरी दी थी। अब दोनों सदनों की स्वीकृति मिलने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद ही यह कानून का रूप लेगा। यह विधेयक Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 के नाम से लाया गया है। इसका उद्देश्य मौजूदा 1971 के कानून में बदलाव करके राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी कानूनी संरक्षण के दायरे में लाना है।
हंगामे के बीच लोकसभा से पारित हुआ बिल
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से हंगामा भी देखने को मिला। इसके बावजूद सदन ने मतदान के बाद विधेयक को पारित कर दिया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे सदन में विचार और पारित करने के लिए रखा था। सरकार का कहना है कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक, यह प्रस्ताव देश की राष्ट्रीय गरिमा और साझा चेतना से जुड़े प्रतीकों के सम्मान को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।
1971 के कानून में होगा बदलाव
वर्तमान में Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से जुड़े कुछ कृत्यों को दंडनीय बनाता है। नए संशोधन के जरिए राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी इसके दायरे में लाने का प्रस्ताव है। यानी कानून बनने के बाद वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे आयोजन में बाधा डालना, जहां इसे गाया जा रहा हो, दंडनीय अपराध के दायरे में आ सकता है। विधेयक में इसके लिए वही अधिकतम सजा प्रस्तावित है जो राष्ट्रगान के गायन में जानबूझकर बाधा डालने से जुड़े अपराधों के लिए निर्धारित है।
वंदे मातरम् के अपमान पर क्या होगी सजा?
प्रस्तावित संशोधन के तहत वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान पैदा करने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। मौजूदा कानून में राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकने या उससे जुड़े कार्यक्रम में बाधा डालने पर भी इसी तरह की सजा का प्रावधान है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी यह विधेयक कानून नहीं बना है। दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और कानून के रूप में अधिसूचित होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू होंगे।
सरकार ने क्या कहा?
विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को राजनीति से ऊपर रखने की बात कही गई। सरकार का तर्क है कि वंदे मातरम् देश के राष्ट्रीय जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है, इसलिए इसके सम्मान के लिए भी कानूनी प्रावधान होना चाहिए। इस संशोधन का मूल उद्देश्य 1971 के कानून में राष्ट्रीय गीत को शामिल करके उसे राष्ट्रगान के समान वैधानिक सुरक्षा प्रदान करना है।
अब आगे क्या होगा?
लोकसभा और राज्यसभा दोनों से विधेयक पारित होने के बाद अगला चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार जिस तारीख से कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी करेगी, उसी के अनुसार इसके प्रावधान प्रभावी होंगे। इस तरह संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में एक अहम कदम आगे बढ़ चुका है।







