चिकित्सा सहायता राशि बढ़ाने समेत कई प्रस्तावों पर समिति करेगी विचार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार विधायक निधि योजना के दिशा-निर्देशों में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। इस उद्देश्य से विधानसभा सचिवालय ने 11 सदस्यीय “विधायक निधि योजना दिग्दर्शिका समिति” का गठन किया है। समिति मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उन्हें समयानुकूल बनाने के लिए सुझाव देगी। समिति की पहली बैठक 2 अगस्त को प्रस्तावित है, जिसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा होगी।
समिति में सत्तारूढ़ भाजपा के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और अपना दल (सोनेलाल) के विधायकों को भी शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य विधायक निधि योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना है, ताकि विकास कार्यों के साथ जरूरतमंद लोगों को अधिक लाभ मिल सके।
चिकित्सा सहायता राशि बढ़ाने पर होगा विचार
बैठक में सबसे अहम मुद्दा विधायक निधि से दी जाने वाली चिकित्सा सहायता राशि का दायरा बढ़ाने का रहेगा। वर्तमान समय में महंगे इलाज और बढ़ती स्वास्थ्य लागत को देखते हुए सहायता राशि बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। यदि समिति इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।
जीएसटी और अन्य प्रावधानों की भी होगी समीक्षा
समिति विधायक निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों पर लगने वाले जीएसटी (GST) के प्रभाव की भी समीक्षा करेगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप स्थापना, स्थानीय विकास कार्यों की प्रक्रिया को सरल बनाने और निधि के बेहतर उपयोग से जुड़े अन्य सुझावों पर भी चर्चा की जाएगी।
नियमों को समयानुकूल बनाने की पहल
पिछले कुछ वर्षों में विकास कार्यों की लागत बढ़ने और नई आवश्यकताओं के सामने आने के कारण विधायक निधि योजना के मौजूदा दिशा-निर्देशों में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी दलों के प्रतिनिधियों को शामिल कर समिति गठित की है, ताकि व्यापक सहमति के आधार पर बदलाव किए जा सकें।
यदि समिति अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपती है और उन्हें मंजूरी मिलती है, तो विधायक निधि योजना के संचालन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। इससे विकास कार्यों में तेजी आने के साथ-साथ जरूरतमंद नागरिकों को मिलने वाली सहायता भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।






