अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस
अहमदाबाद, 7 जुलाई 2026। गुजरात हाई कोर्ट ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने यह फैसला अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट के 18 फरवरी 2022 के निर्णय के खिलाफ दायर पुष्टि (कन्फर्मेशन) याचिका और दोषियों की अपीलों पर सुनवाई के बाद सुनाया।
13 साल चली थी सुनवाई
इस मामले में अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट में वर्ष 2009 से सुनवाई शुरू हुई थी। कुल 78 आरोपियों पर मुकदमा चला। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 18 फरवरी 2022 को अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इनमें 38 को मृत्युदंड और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि सबूतों के अभाव में 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
हाई कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
भारतीय कानून के तहत मृत्युदंड को लागू करने से पहले हाई कोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। इसी कारण राज्य सरकार ने सेशंस कोर्ट के फैसले की पुष्टि के लिए गुजरात हाई कोर्ट में कन्फर्मेशन याचिका दायर की थी। दूसरी ओर, दोषी ठहराए गए आरोपियों ने भी अपनी सजा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सेशंस कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
26 जुलाई 2008 को हुए थे सिलसिलेवार धमाके
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में करीब 20 स्थानों पर 21 सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक माना जाता है।
जांच और सुनवाई के प्रमुख तथ्य
- शुरुआती जांच में 99 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
- 82 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
- आरोपी गुजरात के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों से जुड़े थे।
- अदालत में लगभग 6,000 दस्तावेजी एवं अन्य साक्ष्य पेश किए गए।
- 1,163 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
- सेशंस कोर्ट का फैसला करीब 7,000 पन्नों का था, जबकि पूरे मामले की केस फाइल लगभग 7.88 लाख पन्नों की बताई गई।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद दोषियों के पास अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील का कानूनी विकल्प उपलब्ध रहेगा।








