यूपी में ऑनलाइन ठगी पर बड़ा प्रहार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, सेक्सटॉर्शन और साइबर स्टॉकिंग जैसे अपराधों पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में जल्द ही स्पेशल साइबर कमांडो तैनात किए जाएंगे, जो अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करेंगे।
सरकार का उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई कर नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना है। इसके लिए राज्य स्तर पर साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (UP-S4C) मुख्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।
एआई और कंप्यूटर इंटेलिजेंस का मिलेगा प्रशिक्षण
साइबर कमांडो के रूप में चयनित पुलिसकर्मियों को सिपाही से लेकर डिप्टी एसपी स्तर तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटर इंटेलिजेंस, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर इन्वेस्टिगेशन और सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग की रोकथाम जैसे विषयों में दक्ष बनाया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों की अंतरविभागीय परीक्षा होगी। इसमें सफल होने वाले अधिकारियों को ही साइबर कमांडो के रूप में तैनाती मिलेगी।
डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन गिरोह होंगे निशाने पर
साइबर कमांडो विशेष रूप से उन गिरोहों पर कार्रवाई करेंगे जो खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, न्यायाधीश या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते हैं और उनसे ठगी करते हैं।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर महिलाओं और युवतियों की फोटो या वीडियो का दुरुपयोग, सेक्सटॉर्शन, साइबर स्टॉकिंग तथा ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग करने वाले अपराधियों के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा।
देशभर के राज्यों से होगा सीधा समन्वय
नई व्यवस्था के तहत विभिन्न राज्यों के साइबर अपराध नियंत्रण केंद्र आपस में जुड़े रहेंगे। इससे किसी भी राज्य में बैठे अपराधी के खिलाफ रियल टाइम सूचना साझा कर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों के खिलाफ यह व्यवस्था “सर्जिकल स्ट्राइक” की तरह प्रभावी साबित होगी।
एसटीएफ की तर्ज पर मिल सकता है अतिरिक्त प्रोत्साहन
प्रस्ताव के अनुसार साइबर कमांडो को एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की तर्ज पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव दिए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे प्रशिक्षित अधिकारियों को इस विशेष जिम्मेदारी के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
100 सीट का हाईटेक कॉल सेंटर बनेगा
वर्तमान में लखनऊ के कल्ली पश्चिम स्थित साइबर कॉल सेंटर में 20 सीटें हैं, जबकि डायल-112 में 60 सीटों की व्यवस्था है। अब साइबर अपराधों से निपटने के लिए 100 सीटों वाला आधुनिक कॉल सेंटर विकसित किया जाएगा, जिससे शिकायतों पर प्रतिक्रिया का समय काफी कम होगा।
साइबर अपराध होने पर तुरंत करें 1930 पर कॉल
यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंक फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन या किसी अन्य साइबर अपराध का शिकार होता है या ऐसी आशंका होती है, तो वह तत्काल टोल-फ्री हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर सकता है। यह सेवा 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध रहती है और शिकायत संबंधित राज्य के साइबर कंट्रोल सेंटर तक तुरंत पहुंच जाती है।
डीजीपी साइबर का बयान
पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप राज्य साइबर मुख्यालय की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश की साइबर सेल पहले से ही 24×7 कार्य कर रही है और भविष्य में उत्तर प्रदेश को साइबर अपराध नियंत्रण में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य है।






