50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक
संशोधित समाचार
एटा/जलेसर। श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर पटना पक्षी विहार स्थित प्राचीन पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मंदिर सहित नगर और ग्रामीण क्षेत्र के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर दिनभर “ॐ नमः शिवाय” और “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” के मंत्रोच्चार तथा “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा।
सोमवार सुबह चार बजे से ही पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं और कांवड़ियों ने गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। अनुमानित 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक और दर्शन-पूजन किया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। शिवालयों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल एवं राजस्व कर्मियों की तैनाती रही। एसडीएम पीयूष रावत, क्षेत्राधिकारी ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, तहसीलदार संदीप कुमार सिंह तथा कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अखिलेश दीक्षित ने क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एलआईयू प्रभारी अशोक सारस्वत सहित पुलिस बल भी पूरे समय मुस्तैद रहा।
पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मंदिर के अलावा शिव परशुराम मंदिर, चिंताहरण महादेव मंदिर, बड़केश्वर महादेव मंदिर, नागेश्वर महादेव मंदिर, भैरों बगीची महादेव मंदिर, गंगेश्वर महादेव मंदिर, नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, नूहखेड़ा के कुंडेश्वर महादेव मंदिर तथा डुण्डेश्वर महादेव मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की।
पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मंदिर की पौराणिक मान्यता
पटना पक्षी विहार स्थित पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मंदिर को द्वापरकालीन माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के विवाह का यह मंदिर साक्षी रहा है। कहा जाता है कि रुक्मिणी हरण के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने भगवान शिव को साक्षी मानकर इसी स्थान पर विवाह संपन्न किया था।
एक अन्य स्थानीय मान्यता के अनुसार, राजा कंस के वध के बाद दैत्य कालयवन ने भी कुछ समय तक इसी क्षेत्र के जंगलों में शरण ली थी। इन धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।







