अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों की भूमिका और राम मंदिर ट्रस्ट व धार्मिक समिति में उनकी भागीदारी को लेकर संत समाज में आवाजें उठने लगी हैं। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज के उत्तराधिकारी राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने राम मंदिर की व्यवस्थाओं में लंबे समय तक संघर्ष करने वाले संतों को उचित सम्मान और स्थान दिए जाने की मांग की है।
मीडिया से बातचीत में महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के कठिन दौर में अनेक संतों ने संघर्ष किया, अनशन किए और हिंदू समाज के बीच जनजागरण का काम किया। ऐसे संतों को मंदिर की वर्तमान व्यवस्थाओं से दूर रखा जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए जिन लोगों ने वर्षों तक संघर्ष किया, उनके योगदान को भी मंदिर की व्यवस्था में सम्मान मिलना चाहिए।
‘काम करे मुर्गा, अंडा खाए फकीर’ कहकर साधा निशाना
महंत एकनाथ महाराज ने अपनी बात रखते हुए प्रचलित कहावत ‘काम करे मुर्गा, अंडा खाए फकीर’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर आंदोलन अपने संघर्ष के दौर में था, तब कई संतों ने विपरीत परिस्थितियों में आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया। आज जब भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है, ऐसे में संघर्ष करने वाले संतों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से अपने गुरुदेव जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के साथ-साथ हिंदू समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया है।
धार्मिक समिति में उचित स्थान देने की मांग
महंत एकनाथ महाराज ने मांग की कि जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज को राम मंदिर ट्रस्ट अथवा धार्मिक समिति में उचित स्थान और सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, इससे मंदिर की धार्मिक और सनातन परंपराओं को और मजबूती मिलेगी।
उन्होंने दावा किया कि अयोध्या के पंचकोसी क्षेत्र को मांस और मदिरा से मुक्त कराने के लिए भी उनके गुरुदेव ने आंदोलन किया था। इसके अलावा हिंदू समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों, जिनमें कथित लव जिहाद और प्रताड़ित हिंदुओं के मामले शामिल हैं, को लेकर भी उन्होंने आवाज उठाई।
हिंदू राष्ट्र आंदोलन में योगदान का दावा
महंत एकनाथ महाराज ने जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज को ‘हिंदू राष्ट्र आंदोलन का वर्तमान जनक’ बताते हुए कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर उनके गुरुदेव ने अनशन, संकल्प और आंदोलनों के माध्यम से लगातार आवाज उठाई।
उन्होंने कहा कि आज देशभर में हिंदू राष्ट्र की चर्चा जिस तरह हो रही है, उसके पीछे संत समाज के लंबे संघर्ष और त्याग की भी भूमिका रही है। उनका कहना था कि संघर्ष करने वाले संतों को राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में स्थान देने से सनातन परंपरा और मजबूत होगी।
संतों के योगदान को याद करने की अपील
महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि उनके गुरुदेव और संत समाज के लोगों ने सरयू का जल हाथ में लेकर देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और हिंदू समाज के हितों के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया था। उनके समर्थकों का मानना है कि लंबे समय से चले आ रहे इन संत आंदोलनों ने देश के सामाजिक और राजनीतिक वातावरण को प्रभावित किया है।
महंत एकनाथ महाराज ने सरकार और भाजपा नेतृत्व से अपील की कि राम मंदिर की वर्तमान व्यवस्था में संघर्षशील संतों के योगदान का सम्मान किया जाए और उन्हें उचित स्थान दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक संत का विषय नहीं, बल्कि उन सभी संतों के सम्मान से जुड़ा विषय है, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के कठिन दौर में अपना योगदान दिया।






