शिक्षा, किसान और बेरोजगारी समेत कई मुद्दे उठाए
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव सहित पार्टी के सभी विधायक मौजूद रहे।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी विधानसभा में जनता से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों को मजबूती से उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में 26 हजार से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और स्कूलों के विलय (मर्जर) से करीब 28 लाख बच्चों का नामांकन प्रभावित हुआ है। उनका दावा है कि इसका सबसे अधिक असर दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदाय के बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है।
उन्होंने ‘पीडीए ऑडिट अंक-4‘ जारी करते हुए कहा कि यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का दस्तावेज है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सरकारी नौकरियां कम कर दी हैं, 62 हजार से अधिक शिक्षकों की संख्या घटी है तथा 81 हजार से अधिक शिक्षक पद खाली होने के बावजूद नई भर्ती नहीं की जा रही है।
किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने खाद की उपलब्धता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि किसानों को पूरी बोरी खाद नहीं मिल रही है। साथ ही डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए किसानों की कर्जमाफी की मांग की। उन्होंने कहा कि आलू किसानों को भी उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, एक्सप्रेस-वे, बिजली दरों, राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण और जौहर विश्वविद्यालय जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में उनकी सरकार बनी तो जेपीएनआईसी (JPNIC) को और बेहतर बनाया जाएगा।
मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच इन मुद्दों पर तीखी बहस होने के आसार हैं। आई है।







