भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की विरासत के संवाहक उस्ताद नासिर अब्बास खान के उपचार हेतु केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष सहायता की अपील
वाराणसी। भारतीय शास्त्रीय संगीत की चर्चा जब भी होती है, भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का नाम श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने शहनाई को लोकवाद्य की सीमाओं से निकालकर विश्व के प्रतिष्ठित संगीत मंचों तक पहुंचाया और भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। आज उनकी इसी अमूल्य विरासत को उनके पौत्र उस्ताद नासिर अब्बास खान पूरी निष्ठा, साधना और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
वाराणसी के ऐतिहासिक दालमंडी क्षेत्र के निवासी उस्ताद नासिर अब्बास खान, उस्ताद नैय्यर हुसैन खान के ज्येष्ठ पुत्र तथा भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पौत्र हैं। वे पारंपरिक हिंदुस्तानी शास्त्रीय शहनाई वादन की परंपरा का संरक्षण और संवर्धन कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने दादा से जुड़ी दुर्लभ स्मृतियों, दस्तावेजों और सांस्कृतिक धरोहर को भी सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
हाल ही में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्काघात) आने के बाद वाराणसी के एक न्यूरोलॉजी सेंटर में भर्ती कराया गया था। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार हुआ और स्वास्थ्य में सुधार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों के अनुसार अगस्त माह में उनका एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन प्रस्तावित है, जिसके लिए निरंतर चिकित्सकीय देखभाल और आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है।
उनके अस्वस्थ होने की सूचना सामने आने के बाद देशभर के संगीतज्ञों, कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं और संगीत प्रेमियों ने चिंता व्यक्त करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। यह केवल एक कलाकार के प्रति संवेदना नहीं, बल्कि भारत की उस सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान है, जिसने देश का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया है।
ऐसे समय में आवश्यकता केवल संवेदना व्यक्त करने की नहीं, बल्कि ठोस सहयोग की भी है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, संस्कृति मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग, संगीत नाटक अकादमी तथा जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे उस्ताद नासिर अब्बास खान के उपचार, आगामी ऑपरेशन और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए विशेष सहायता उपलब्ध कराने पर गंभीरता से विचार करें। ऐसे कलाकार केवल अपने परिवार की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक पूंजी होते हैं।
साथ ही यह भी समय की मांग है कि भारत सरकार उन वंशानुगत कलाकारों के लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करे, जिन्होंने पीढ़ियों से भारतीय कला और संस्कृति का संरक्षण किया है। उनके लिए विशेष चिकित्सा सहायता, स्वास्थ्य बीमा, आर्थिक सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण की योजनाएं बनाई जानी चाहिए, ताकि कठिन परिस्थितियों में उन्हें आवश्यक सहयोग मिल सके।
भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने संगीत को कभी सम्मान या पुरस्कार प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि उसे ईश्वर की उपासना समझकर जीवनभर साधना की। आज उनके परिवार की नई पीढ़ी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में यदि इस अमूल्य विरासत के संवाहकों को समय पर संरक्षण और सहयोग नहीं मिला, तो यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की भी क्षति होगी।
सरकार से विनम्र अपील
हम भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं स्वास्थ्य विभाग तथा सभी जनप्रतिनिधियों से विनम्र आग्रह करते हैं कि उस्ताद नासिर अब्बास खान के उपचार एवं प्रस्तावित ऑपरेशन के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की संगीत परंपरा के संरक्षण तथा उनके परिवार के सांस्कृतिक योगदान को सशक्त बनाने के लिए विशेष योजना तैयार करने पर भी विचार किया जाए।





















