मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया उद्घाटन, रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में देखने का मिलेगा अवसर
अयोध्या।
रामनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब रामायण के पात्रों और प्रसंगों को एक नए और आकर्षक स्वरूप में देखने का अवसर मिलेगा। रामघाट क्षेत्र में स्थापित सुनील्स रामायण वैक्स म्यूजियम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। यह संग्रहालय न केवल पर्यटन का नया केंद्र बनेगा, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो सकता है।
प्रसिद्ध वैक्स कलाकार सुनील कंडलूर की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में भगवान श्रीराम के जीवन, रामायण के प्रमुख प्रसंगों और उससे जुड़े पात्रों को वास्तविक आकार की मोम प्रतिमाओं के माध्यम से जीवंत रूप देने का प्रयास किया गया है। वर्तमान में संग्रहालय में लगभग 40 प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जबकि भविष्य में इस संख्या को बढ़ाकर 200 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
कन्याकुमारी से अयोध्या तक का सफर
संग्रहालय के संस्थापक सुनील कंडलूर वर्ष 2001 से वैक्स मॉडलिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने वर्ष 2005 में तमिलनाडु के कन्याकुमारी में भारत का पहला वैक्स म्यूजियम स्थापित किया था। इसके बाद महाराष्ट्र के लोनावला और केरल के तिरुवनंतपुरम में भी संग्रहालय स्थापित किए गए। अब अयोध्या में रामायण पर आधारित यह विशेष संग्रहालय उनकी सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में माना जा रहा है।
अब तक वे 400 से अधिक मोम प्रतिमाओं का निर्माण कर चुके हैं और भारतीय इतिहास, संस्कृति तथा राष्ट्रीय व्यक्तित्वों को कला के माध्यम से जीवंत बनाने का कार्य कर रहे हैं।
रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, जीवन-दर्शन भी
विशेषज्ञों का मानना है कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय समाज की नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का आधार है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और न्याय का संदेश देता है। ऐसे में रामायण के प्रसंगों को आधुनिक प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित करना नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
आज जब डिजिटल युग में बच्चों और युवाओं का अधिकांश समय मोबाइल और इंटरनेट पर बीत रहा है, तब ऐसे संग्रहालय उन्हें भारतीय संस्कृति और इतिहास से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
संस्कृति का संरक्षण क्यों जरूरी?
किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी आर्थिक ताकत से नहीं होती, बल्कि उसकी सांस्कृतिक विरासत भी उसकी सबसे बड़ी पूंजी होती है। भारत की सभ्यता हजारों वर्षों पुरानी है और इसकी परंपराएं, साहित्य, धर्मग्रंथ तथा लोकसंस्कृति विश्वभर में सम्मान के साथ देखी जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक और सामाजिक जड़ों से दूर हो सकती हैं। ऐसे में संग्रहालय, सांस्कृतिक केंद्र और विरासत परियोजनाएं केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण के महत्वपूर्ण साधन बन जाते हैं।
अयोध्या के पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या देश के सबसे प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो चुकी है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। ऐसे में रामायण वैक्स म्यूजियम पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बन सकता है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक और अनुभवात्मक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा।
विरासत और आधुनिकता का संगम
रामायण वैक्स म्यूजियम यह दर्शाता है कि परंपरा और आधुनिक तकनीक एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। मोम प्रतिमाओं और आधुनिक प्रदर्शन तकनीकों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को नए रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में संग्रहालय सांस्कृतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं।
अयोध्या का यह नया संग्रहालय भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभव देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का कार्य करेगा।
आयोजकों के अनुसार आने वाले वर्षों में 200 से अधिक प्रतिमाओं के साथ यह संग्रहालय रामायण के लगभग सभी प्रमुख प्रसंगों को समेटेगा और देश के प्रमुख सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।






