जलेसर (एटा)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में तहसील बार एसोसिएशन जलेसर का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रजिस्ट्री कार्यालय की तालाबंदी और धरना प्रदर्शन शनिवार को छठे दिन भी जारी रहा। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक ई-पंजीकरण व्यवस्था से संबंधित शासनादेश निरस्त नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
शनिवार को तहसील बार एसोसिएशन ने महामहिम राज्यपाल के नाम छठवां ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) जलेसर के माध्यम से भेजा। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार तहसील स्तर पर होने वाले पारंपरिक पंजीकरण कार्य को समाप्त कर ग्राम पंचायत स्तर पर ‘निबंधन मित्र’ के माध्यम से ई-रजिस्ट्री प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे न केवल अधिवक्ताओं की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि दस्तावेज लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह यादव और सचिव द्विजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि अधिवक्ता पिछले 15 जून से शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। उनका कहना है कि जिला स्तर पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय से जारी सूचना में भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सरकार ई-पंजीकरण व्यवस्था को वापस लेने जा रही है या नहीं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था और तकनीकी सुधारों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन ऐसी किसी भी नीति को लागू करने से पहले उससे प्रभावित पक्षों से व्यापक संवाद होना चाहिए। उनका तर्क है कि तहसीलों में वर्षों से संचालित पंजीकरण प्रणाली को अचानक बदलने से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी व कानूनी जटिलताएं भी बढ़ सकती हैं।
बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि ई-पंजीकरण प्रणाली पर पुनर्विचार करते हुए हितधारकों के साथ संवाद स्थापित किया जाए, ताकि तकनीकी आधुनिकीकरण और रोजगार सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सके।
धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता रामप्रकाश सिंह ने की, जबकि संचालन सुनील यादव ने किया। आंदोलन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया और सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की।
अधिवक्ताओं का मानना है कि न्यायिक और राजस्व व्यवस्था से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव को लागू करते समय स्थानीय परिस्थितियों, रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव और आम नागरिकों की सुविधा को समान रूप से ध्यान में रखना आवश्यक है। यही कारण है कि जलेसर में ई-रजिस्ट्री के विरोध का यह आंदोलन अब केवल पेशेगत मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधारों और जनहित के बीच संतुलन की बहस का विषय भी बनता जा रहा है।







