बीमा का पैसा पहुंचा, पर रजिस्ट्री पर अटकी तस्वीर- किसानों की संख्या बढ़ाने की कवायद तेज
बलिया। जिले में खरीफ 2025 और रबी 2025-26 के तहत फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को राहत की रकम तो मिलनी शुरू हो गई है, लेकिन तहकीकात में यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में किसान अब भी बीमा दायरे से बाहर हैं। सोमवार को विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसानों को डीबीटी के जरिए क्षतिपूर्ति राशि जारी की गई। चयनित लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक भी सौंपे गए।
सूत्रों के अनुसार, जिन किसानों को भुगतान मिला है उनमें हीरा सिंह (₹77,623.92), बच्चा सिंह (₹32,691.97), राम प्रवेश (₹20,961.01), रामनाथ उपाध्याय (₹22,514.07), रविशंकर उपाध्याय (₹22,530.17), जयश्री, बिंदु देवी (दोनों ₹22,519.35), राजकुमार सिंह (₹21,779.70), रामायण सिंह (₹18,695.23) और बटकेश्वर सिंह (₹18,056.65) शामिल हैं। हालांकि यह सूची प्रतीकात्मक है—जिले में वास्तविक लाभार्थियों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है।
जमीनी पड़ताल: क्यों छूट रहे हैं किसान ?
तहकीकात में तीन बड़े कारण सामने आए। फार्मर रजिस्ट्री का अभाव: कई किसानों की डिजिटल प्रविष्टि नहीं हुई है, जिससे वे योजनाओं से स्वतः लिंक नहीं हो पा रहे।
आवेदन में तकनीकी त्रुटियां: खसरा-खतौनी, आधार और बैंक खाते में असमानता के चलते आवेदन निरस्त हो रहे हैं।
जागरूकता की कमी: गांव स्तर पर अभी भी बीमा और रजिस्ट्री को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं पहुंची है।
कृषि विभाग के आंतरिक आंकलन के मुताबिक, बीमा कवरेज बढ़ाने की बड़ी गुंजाइश है। कई ब्लॉकों में बीमित किसानों का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है, जबकि प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बराबर बना रहता है।
क्या है ‘फार्मर रजिस्ट्री’ और क्यों जरूरी?
फार्मर रजिस्ट्री एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें किसान की पहचान और खेती से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज होती है। आधार/मोबाइल और बैंक खाता भूमि का रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी)
बोई गई फसल का विवरण
पूर्व में मिले सरकारी लाभ
इससे क्या बदलेगा?
DBT की सटीकता:
पैसा सीधे सही खाते में, बिना बिचौलिये।
क्लेम में तेजी:
फसल बीमा का निपटान डेटा-आधारित और तेज।
फर्जीवाड़े पर रोक:
डुप्लीकेट/गलत प्रविष्टियां कम होंगी।
सब्सिडी व ऋण में आसानी:
सत्यापित प्रोफाइल के आधार पर प्राथमिकता।
एकीकृत लाभ:
भविष्य की ज्यादातर कृषि योजनाएं इसी आईडी से लिंक होंगी।
किसानों की आवाज
कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने बीमा क्लेम में देरी, आवेदन निरस्त होने और फसल कटाई प्रयोग (सीसीई) के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए। कुछ किसानों ने यह भी कहा कि रजिस्ट्री और बीमा के बीच तालमेल स्पष्ट न होने से दिक्कतें बढ़ती हैं। विभागीय स्तर पर ब्लॉकवार कैंप, ग्राम पंचायतों में जागरूकता अभियान और डेटा शुद्धिकरण (आधार-खाता-खसरा मिलान) की तैयारी बताई जा रही है। लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसानों को बीमा और रजिस्ट्री से जोड़ा जाए, ताकि अगले सीजन में कवरेज बढ़े।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने कहा कि “जिले में फसल बीमा से जुड़े किसानों की संख्या बढ़ाना प्राथमिकता है। फार्मर रजिस्ट्री इस पूरी प्रक्रिया की रीढ़ है—जिन किसानों की रजिस्ट्री होगी, वही योजनाओं का पूरा लाभ पारदर्शी तरीके से पा सकेंगे।”
उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि बीमित किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, आवेदन/स्वीकृति/निरस्तीकरण का पारदर्शी डेटा और गांव-स्तर पर विशेष अभियान चलाकर अधिकतम किसानों को जोड़ा जाए। साथ ही, किसानों से अपील की कि वे अपने गांव में रजिस्ट्री के लिए आगे आएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।




