लखनऊ, 19 सितंबर 2026। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सेंट्रम होटल में पॉश अधिनियम, 2013 के तहत जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में होटल के 60 से अधिक कर्मचारियों, अधिकारियों और आंतरिक समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम, शिकायत की प्रक्रिया और कर्मचारियों के अधिकारों व जिम्मेदारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला के मुख्य संदर्भदाता जिजीविषा सोसाइटी की एडवोकेट मंजरी उपाध्याय, रुपाली सिंह और आरती गुंजन मेर्ह रहीं। उन्होंने पॉश अधिनियम के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल केवल नियम-कानूनों के पालन से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और जिम्मेदार व्यवहार से तैयार होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सर्वेश गोयल ने की, जबकि संचालन आंतरिक समिति की पीठासीन अधिकारी राधिशा ने किया।
कार्यक्रम के दौरान Aureliano Fernandes बनाम State of Goa मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के संदर्भ में भी जानकारी दी गई। साथ ही पॉश अधिनियम, 2013 की धारा 19 के तहत नियोक्ता की जिम्मेदारियों तथा कार्यस्थल पर जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि शिकायत सामने आने पर उसे गंभीरता से लेना, निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना और शिकायतकर्ता के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना एक स्वस्थ और भरोसेमंद कार्यस्थल की महत्वपूर्ण जरूरत है।
जिजीविषा सोसाइटी शी-बॉक्स (SHe-Box) से संबद्ध लखनऊ स्थित संस्थाओं में पॉश अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार कार्यशालाएं आयोजित करती रही है। संस्था का उद्देश्य कर्मचारियों और आंतरिक समितियों को कानून की जानकारी देने के साथ उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। सेंट्रम होटल में आयोजित यह कार्यशाला भी इसी प्रयास की एक कड़ी रही, जहां कानूनी जानकारी के साथ ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करने पर जोर दिया गया जिसमें हर कर्मचारी खुद को सुरक्षित, सम्मानित और सहज महसूस कर सके।





















