भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को प्रतिष्ठित मैरीलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) की मानद आजीवन सदस्यता मिलने पर उन्होंने इसे अपने क्रिकेट करियर के सबसे बड़े सम्मानों में से एक बताया। पुजारा ने कहा कि लंबे समय तक काउंटी क्रिकेट खेलने के कारण इंग्लैंड अब उन्हें अपने दूसरे घर जैसा महसूस होता है।
38 वर्षीय पुजारा ने कहा कि उन्होंने राजकोट के बाद सबसे अधिक समय इंग्लैंड में बिताया है। भारतीय टीम के साथ तीन बार इंग्लैंड दौरे पर जाने के अलावा उन्होंने काउंटी क्रिकेट में कई क्लबों का प्रतिनिधित्व किया, जिससे वहां की परिस्थितियों और माहौल से उनका गहरा जुड़ाव बन गया।
पुजारा ने कहा कि एमसीसी की मानद आजीवन सदस्यता मिलना उनके लिए गर्व का क्षण है। उनके अनुसार, एक क्रिकेटर के रूप में वर्षों की मेहनत के बाद जब इस तरह की पहचान मिलती है तो अपनी उपलब्धियों पर विशेष गर्व महसूस होता है।
लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड से जुड़ी अपनी यादें साझा करते हुए पुजारा ने बताया कि 2011 में घुटने की सर्जरी के दौरान उन्होंने पहली बार इस ऐतिहासिक मैदान का दौरा किया था। बचपन से उनका सपना लॉर्ड्स में खेलने का था, जो बाद में पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि इस मैदान का माहौल और ऊर्जा अन्य किसी भी क्रिकेट मैदान से अलग है।
हालांकि भारत की ओर से खेलते हुए वह लॉर्ड्स में टेस्ट शतक नहीं बना सके, लेकिन काउंटी क्रिकेट में ससेक्स के लिए इसी मैदान पर दोहरा शतक जड़ चुके हैं। पुजारा ने स्वीकार किया कि यदि अपने करियर में किसी एक चीज़ को बदलना चाहें तो वह लॉर्ड्स में टेस्ट शतक बनाना होगा।
उन्होंने लॉर्ड्स की पिच को बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि यहां बल्लेबाजी के लिए धैर्य और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना बेहद जरूरी होता है। एक बार बल्लेबाज पिच और ढलान के साथ तालमेल बैठा ले तो यह रन बनाने के लिए शानदार विकेट साबित होती है।
ऑस्ट्रेलिया में अपने शानदार टेस्ट रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए पुजारा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्हें ऑस्ट्रेलिया में बल्लेबाजी करना बेहद पसंद रहा है। उनका मानना है कि वहां शुरुआती चुनौती पार करने के बाद बल्लेबाजी अपेक्षाकृत आसान हो जाती है, जबकि इंग्लैंड में परिस्थितियां हमेशा बल्लेबाजों की परीक्षा लेती हैं, हालांकि हाल के वर्षों में वहां की पिचों में कुछ बदलाव देखने को मिला है।








