फंसे सेस क्रेडिट, आईटीसी और अनुपालन संबंधी मुद्दों पर हुई चर्चा, राज्य कर विभाग ने समाधान का दिया भरोसा
संतकबीरनगर। राज्य कर विभाग ने सोमवार को अपने कार्यालय में जीएसटी 2.0 को लेकर ऑटोमोबाइल क्षेत्र के व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए), कर अधिवक्ताओं और व्यापारी नेताओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त राज्य कर राजेश कुमार पांडेय और विनय कुमार गुप्त ने की।
बैठक का उद्देश्य जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुए बदलाव, नए टैक्स स्लैब तथा व्यापारियों के समक्ष आ रही व्यावहारिक और तकनीकी समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान की दिशा में पहल करना था।
फंसे सेस क्रेडिट का मुद्दा उठा
संवाद के दौरान व्यापारियों ने बताया कि वाहनों पर कंपनसेशन सेस समाप्त होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में पुराने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का बड़ा हिस्सा फंस गया है। इससे ऑटोमोबाइल डीलर्स की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो रही है। कर अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने भी जीएसटी अनुपालन और तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़े सुझाव विभाग के समक्ष रखे।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने पर जोर
उपायुक्त विनय कुमार गुप्त ने कहा कि सरकार और राज्य कर विभाग का उद्देश्य व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है। वहीं उपायुक्त राजेश कुमार पांडेय ने कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत कर दरों को अधिक तर्कसंगत बनाया गया है, जिससे ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मांग बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि फंसे हुए सेस क्रेडिट सहित अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए विभाग गंभीरता से कार्य कर रहा है। साथ ही कर अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से व्यापारियों और विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर नए नियमों के प्रभावी अनुपालन में सहयोग देने की अपील की।
कार्यक्रम में ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पदाधिकारी रवि कुमार, निकेश पोद्दार, विवेक कुमार, नरेंद्र चौधरी, वरिष्ठ व्यापारी नेता श्रवण अग्रहरी, विनीत चड्ढा, अमित जैन, कर बार एसोसिएशन के अधिवक्ता अभिनव अग्रवाल, दीपक श्रीवास्तव, पंकज गुप्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स तथा राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त कुमार गौरव सिंह, धम्म प्रिय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।





















