अमेरिका ने ईरान पर तेल प्रतिबंधों में दी 60 दिन की राहत
नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान के तेल क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी राहत देते हुए कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, परिवहन और संबंधित सेवाओं की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा जारी अस्थायी सामान्य लाइसेंस 21 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत ईरान को तेल निर्यात से जुड़ी शिपिंग, बीमा और बैंकिंग सेवाओं तक सीमित अवधि के लिए पहुंच मिल सकेगी। माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा संभावित शांति समझौते की दिशा में उठाया गया है।
भारत को कैसे होगा फायदा?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में कमी आने से देश का आयात बिल घट सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरानी तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती है तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनेगा और भारत को सस्ता तेल मिलने की संभावना बढ़ेगी।
पहले भी भारत का बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है ईरान
अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ईरान भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। भारतीय रिफाइनरियां ईरानी कच्चे तेल के अनुरूप विकसित की गई थीं और ईरान से भुगतान व क्रेडिट की शर्तें भी अपेक्षाकृत अनुकूल मानी जाती थीं। प्रतिबंध लागू होने के बाद भारत को रूस, इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों पर अधिक निर्भर होना पड़ा।
पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता होगा?
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका सीधा और तत्काल असर पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों पर दिखना जरूरी नहीं है। ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय तेल दरों के अलावा करों, परिवहन लागत, विनिमय दर और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य नीति पर भी निर्भर करती हैं।
होर्मुज मार्ग से आपूर्ति सुरक्षा को भी मिलेगा लाभ
भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जोखिम घट सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थिर रहने की संभावना है। ईरान को मिली 60 दिनों की अमेरिकी छूट वैश्विक तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था आगे भी जारी रहती है और ईरानी तेल की आपूर्ति बढ़ती है, तो भारत को सस्ते तेल, कम आयात लागत और बेहतर आपूर्ति सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वास्तविक राहत मिलने के लिए आने वाले हफ्तों में बाजार की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।








