टोल पार करने के बाद बदलती थी गाड़ी; ऐसे पुलिस के रडार से बचने की कोशिश
लखनऊ। शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को पुलिस ने 20 अक्तूबर की शाम महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर लिया। 9 अक्तूबर की रात शिवा शर्मा की मौत के बाद से फरार श्रद्धा करीब 10 दिनों तक अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदलती रही। पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, उसने नेपाल से लेकर उत्तर प्रदेश और फिर महाराष्ट्र तक का सफर किया। इस दौरान होटल बदलने, अलग-अलग वाहनों से यात्रा करने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल सीमित रखने जैसी गतिविधियां सामने आई हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और नागपुर पुलिस के समन्वय से गिरफ्तारी की गई। गिरफ्तारी के बाद उसे लखनऊ लाया जा रहा था और अदालत में पेश किए जाने की तैयारी थी। पुलिस अब उसके फरार रहने के दौरान संपर्क में आए लोगों और यात्रा के पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।
9 अक्तूबर की घटना के बाद शुरू हुई तलाश
पुलिस के मुताबिक, 9 अक्तूबर की रात शिवा शर्मा की मौत की सूचना सामने आई थी। घटना श्रद्धा के फ्लैट में हुई थी। अगले दिन 10 अक्तूबर को शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और दो अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद श्रद्धा पुलिस की पकड़ से बाहर हो गई। जांच के दौरान उसकी गाड़ी बहराइच के रुपईडीहा क्षेत्र में लावारिस हालत में बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों, आवाजाही और संपर्कों की जानकारी जुटानी शुरू की।
नेपाल में होटल में रुकी, ड्राइवर के पहचान पत्र का इस्तेमाल
जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, 11 अक्तूबर को श्रद्धा नेपाल के महिमनगर में ई-रिक्शा से जाती हुई सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दी। उसके साथ उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश उर्फ तनवीर भी मौजूद था।
बताया गया कि तीनों ने वहां एक सस्ते होटल में कमरा लिया। होटल में पहचान के लिए ड्राइवर का आधार कार्ड इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। तीनों एक ही कमरे में ठहरे थे। पुलिस इस अवधि की गतिविधियों और होटल में दर्ज विवरण की जांच कर रही है।
दांग जिले में फोन चालू होने से मिली लोकेशन
उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक, नेपाल में ठहरने के बाद श्रद्धा दांग जिले पहुंची। वहां उसने कुछ समय के लिए अपना मोबाइल फोन चालू किया और फिर बंद कर दिया। इसके बाद नेपाली सिम के माध्यम से संपर्क किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
पुलिस को फोन चालू होने के दौरान उसकी लोकेशन का सुराग मिला। इसके बाद उसने अपना ठिकाना बदल लिया। जांच एजेंसियां मोबाइल से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसकी आवाजाही की कड़ियां जोड़ती रहीं।
नेपाल से लौटकर रायबरेली पहुंची
पुलिस की जांच के अनुसार, श्रद्धा ने 15 अक्तूबर को नेपाल छोड़ा और कुशीनगर के रास्ते उत्तर प्रदेश में दाखिल हुई। अगले दिन वह रायबरेली पहुंची। बताया गया कि सीसीटीवी कैमरों में दिखाई देने की आशंका के चलते उसने बस स्टेशन के पास उस वाहन को छोड़ दिया, जिससे वह नेपाल से आई थी।
इसके बाद उसने दूसरी टैक्सी से सारस तिराहे तक सफर किया और वहां से किराये पर अर्टिगा कार ली। रिपोर्ट के मुताबिक, रायबरेली में उसकी एक सट्टा कारोबारी से मुलाकात होने की भी बात सामने आई है। हालांकि, इस मुलाकात और संबंधित व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।
रात करीब 12 बजे वह रायबरेली से लखनऊ पहुंची। इसी दौरान उसने एक समाचार एजेंसी को बयान भी दिया। बताया गया कि उसने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद वह फिर लखनऊ से निकल गई।
आगरा के होटल में 24 घंटे ठहरने की जानकारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ से निकलने के बाद श्रद्धा आगरा पहुंची और वहां ओम पैलेस होटल में करीब 24 घंटे तक रुकी। इस दौरान उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश भी साथ थे।
रिपोर्ट के अनुसार, होटल के सीसीटीवी फुटेज में श्रद्धा बुर्का पहने दिखाई दी। पुलिस सूत्रों का दावा है कि वह पहचान छिपाने के लिए यात्रा के दौरान बुर्के का इस्तेमाल कर रही थी। हालांकि, उसके हर ठिकाने पर कपड़े बदलने या पहचान छिपाने के तरीके को लेकर विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगरा में ठहरने के बाद तीनों महाराष्ट्र के नागपुर की ओर रवाना हुए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रास्ते में उन्होंने अपने सामान्य मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया। जांच में एक अलग फोन के जरिए कुछ लोगों से संपर्क किए जाने की आशंका भी सामने आई है।
टोल पार करने के बाद गाड़ी बदलने की बात की भी जांच
श्रद्धा की फरारी के दौरान अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रायबरेली में वाहन छोड़ने और दूसरी टैक्सी के जरिए आगे बढ़ने का घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट में टोल पार करने के बाद गाड़ी बदलने की बात भी उठाई गई है, लेकिन हर टोल के बाद वाहन बदलने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन वाहनों का इस्तेमाल किया गया, उन्हें किसने उपलब्ध कराया और यात्रा के दौरान किन लोगों ने मदद की। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि फरारी के दौरान श्रद्धा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या किसी ने उसे ठिकाने या परिवहन की व्यवस्था उपलब्ध कराई थी।
नागपुर में गिरफ्तारी के बाद आगे की जांच
20 अक्तूबर को नागपुर में गिरफ्तारी के साथ श्रद्धा की फरारी का सिलसिला समाप्त हुआ। अब पुलिस के सामने घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने, फरारी के दौरान उसकी गतिविधियों का ब्योरा जुटाने और कथित मददगारों की भूमिका की जांच करने की चुनौती है।
फिलहाल मामले में सामने आए कई तथ्य पुलिस सूत्रों और शुरुआती जांच पर आधारित हैं। श्रद्धा दुबे पर लगे आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच होगी। उसकी गिरफ्तारी अपने आप में आरोपों को सिद्ध नहीं करती। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस की विस्तृत जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।





















