पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को घटनाक्रम तेजी से बदले। ममता बनर्जी के सामने एक के बाद एक तीन ऐसी परिस्थितियां आईं, जिनसे नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर उनकी रणनीति प्रभावित हुई। सबसे पहले चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के पुराने नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद नंदीग्राम से उनके गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके कुछ ही समय बाद ममता के समर्थन वाले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हो गई।
TMC के नाम और पुराने चुनाव चिह्न पर EC का फैसला
चुनाव आयोग ने पार्टी के अंदर चल रहे विवाद के बीच ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाले पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। आगामी उपचुनावों को देखते हुए आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह मिला है। चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए 21 सितंबर को मामला रखे जाने की संभावना बताई गई है।
नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार ने नामांकन लिया वापस
इसी बीच नंदीग्राम उपचुनाव में ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के कुछ घंटों बाद यह फैसला लिया। हालांकि नामांकन वापस लेने की वजह उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की है। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया।
समर्थन के कुछ घंटे बाद कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार
ममता बनर्जी के मिलन प्रधान के समर्थन की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में हुई है। पुलिस ने लंबित वारंट का हवाला दिया है। मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद TMC और कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए हैं। TMC नेता कुणाल घोष ने कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। दूसरी ओर, गिरफ्तारी का आधार पुलिस की ओर से पुराने मामले में लंबित कानूनी कार्रवाई बताया गया है। इन घटनाओं के बाद 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में गतिविधियां और तेज हो गई हैं।





















