लखनऊ। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज हुई है, लेकिन ट्रस्ट डीड और सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले के अनुसार ट्रस्ट को किसी भी परिस्थिति में भंग नहीं किया जा सकता। हालांकि, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं में निर्धारित नियमों के तहत सीमित संशोधन किए जा सकते हैं।
निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है। इससे पहले हिंदू महासभा भी ऐसी मांग उठा चुकी है। इसके बाद ट्रस्ट की स्थापना से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को ट्रस्ट का गठन किया। ट्रस्ट डीड में इसे ‘अपरिवर्तनीय (Irrevocable)’ बताया गया है, जिसका अर्थ है कि इसे समाप्त या भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है।
ट्रस्ट डीड के अनुसार केवल ट्रस्टियों में बदलाव, उनके इस्तीफे या दो-तिहाई बहुमत से उन्हें हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है। बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को डीड में संशोधन का अधिकार है, लेकिन ऐसा कोई संशोधन नहीं किया जा सकता जो ट्रस्ट के मूल उद्देश्य, केंद्र सरकार की योजना या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत हो।
चढ़ावा चोरी के बाद सुरक्षा और कड़ी
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। मंदिर परिसर में निजी सुरक्षाकर्मियों की संख्या 300 से बढ़ाकर 350 कर दी गई है। साथ ही उनका मासिक मानदेय 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया गया है।
मंदिर की सुरक्षा पहले से उत्तर प्रदेश पुलिस, पीएसी और अन्य सरकारी एजेंसियों के जिम्मे है। इसके अतिरिक्त निजी सुरक्षा एजेंसियों के कर्मी प्रवेश द्वारों, परिक्रमा मार्ग, यात्री सेवा केंद्र और अन्य संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एसआईटी जांच के बाद सामने आएगा सच
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच एसआईटी कर रही है, जो अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। जनप्रतिनिधियों ने पूर्व महासचिव चंपत राय से मुलाकात कर कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले का सच सामने आ जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।






