इलिया कस्बे की अनुसूचित जाति बस्ती में गंदगी और जलभराव से जनजीवन बेहाल, जगह-जगह कूड़े का अंबार; ग्रामीणों ने नियमित सफाई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठाई मांग
चंदौली। स्वच्छता को लेकर सरकार की ओर से भले ही तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हों, लेकिन शहाबगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत इलिया में सफाई व्यवस्था की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। सफाई कर्मियों की कथित लापरवाही से परेशान होकर अब महिलाओं को खुद ही सफाई का मोर्चा संभालना पड़ रहा है। शनिवार को कस्बे की अनुसूचित जाति बस्ती में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां नालियों की सफाई नहीं होने से परेशान एक महिला फावड़ा लेकर खुद नाली में उतर गई। सफाई व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता यह दृश्य जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा हुआ है। नालियों में गंदगी जमा होने से पानी की निकासी बाधित हो रही है। कई स्थानों पर नालियों से निकाली गई गंदगी भी किनारे छोड़ दी गई है, जिससे आसपास दुर्गंध फैल रही है। रास्तों पर गंदा पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे खराब स्थिति अनुसूचित जाति बस्ती की बताई जा रही है, जहां लंबे समय से नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
सफाई कर्मियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मी नियमित रूप से गांव में नहीं आते हैं। कभी-कभार पहुंचते भी हैं तो चुनिंदा स्थानों पर सफाई कराकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं। आरोप यह भी है कि सफाई कर्मियों के स्थान पर दूसरे मजदूरों से काम कराया जाता है, इसके बावजूद पूरे कस्बे की सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पा रही है। नालियों में जमा कचरे और जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका भी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदार कर्मचारी अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं तो उन्हें मजबूर होकर खुद सफाई के लिए आगे आना पड़ रहा है।
एडीओ पंचायत ने ग्राम प्रधान पर डाली जिम्मेदारी
मामले में एडीओ पंचायत अरविंद सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इलिया कोई छोटा-मोटा गांव नहीं है। सफाई का कार्य उनके अंतर्गत नहीं आता, बल्कि इसकी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की है। इतना कहने के बाद उन्होंने फोन काट दिया। ऐसे में ग्रामीणों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि सफाई कर्मियों की तैनाती, उनकी उपस्थिति और कार्यों की निगरानी आखिर कौन करेगा। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर कस्बे में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराने और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।





















