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अखिलानंद तिवारी
बलिया। जनपद के लिए बहुप्रतीक्षित सौगात आखिरकार साकार होने जा रही है। प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की मंजूरी के साथ ‘महर्षि भृगु स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय’ की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। लगभग 437 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह मेडिकल कॉलेज न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पूर्वांचल के शिक्षा और चिकित्सा ढांचे को भी मजबूत करेगा। देखा जाए तो बलिया लंबे समय से एक ऐसे मेडिकल संस्थान की प्रतीक्षा कर रहा था, जो जिले को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता से मुक्त कर सके। अब ‘महर्षि भृगु’ के नाम पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज उस कमी को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सात अप्रैल 2026 को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी मिलते ही इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। यह मेडिकल कॉलेज शहर के पुराने जिला कारागार की लगभग 14 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि परिसर के एक हिस्से में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चित्तू पांडेय की स्मृति में एक भव्य स्मारक भी बनाया जाएगा, जिससे यह परियोजना केवल चिकित्सा केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र बनेगी। परियोजना के तहत एक आधुनिक 10 मंजिला शैक्षणिक भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें अत्याधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और मेडिकल शिक्षा से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही 200 बेड का सुसज्जित अस्पताल तैयार किया जाएगा, जिसमें इमरजेंसी सेवाएं, ट्रॉमा सेंटर, 20 बेड का आईसीयू, मॉड्यूलर ओपीडी, ब्लड बैंक और पोस्टमार्टम हाउस जैसी सुविधाएं होंगी। डॉक्टरों, शिक्षकों और छात्रों के लिए आवासीय परिसर तथा एक भव्य ऑडिटोरियम भी प्रस्तावित है। इस मेडिकल कॉलेज के शुरू होने से न केवल बलिया, बल्कि आसपास के जिलों मऊ, गाजीपुर और देवरिया के लाखों लोगों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगी। अब तक गंभीर मरीजों को वाराणसी, गोरखपुर या लखनऊ का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती थी। यह परियोजना उस समस्या का स्थायी समाधान बन सकती है। सरकार की योजना के अनुसार, जल्द ही इसका शिलान्यास किया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू होगा। यदि कार्य तय समयसीमा में आगे बढ़ा, तो आने वाले 2 से 3 वर्षों में यह मेडिकल कॉलेज पूरी तरह से संचालित होने लगेगा। इसके साथ ही जिले में मेडिकल शिक्षा के नए अवसर भी खुलेंगे और स्थानीय युवाओं को अपने ही जनपद में एमबीबीएस जैसी पढ़ाई का मौका मिल सकेगा। दरअसल, यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बलिया के विकास की नई धुरी बन सकती है। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्माण कार्य कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है, ताकि यह सपना जल्द हकीकत में बदल सके। महर्षि भृगु मेडिकल कॉलेज बलिया के लिए सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे उस सपने की पूर्ति है, जो बेहतर इलाज और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा की उम्मीद से जुड़ा है। यदि यह परियोजना तय समय और मानकों के अनुरूप पूरी होती है, तो यह पूर्वांचल के स्वास्थ्य मानचित्र पर बलिया को एक नई पहचान दिला सकती है। *कहां बनेगा मेडिकल कॉलेज ?* -यह कॉलेज पुरानी जिला कारागार की करीब 14 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। -अतिरिक्त ढाई एकड़ भूमि पर स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय का स्मारक भी बनाया जाएगा। *क्या-क्या बनेगा ?* -मेडिकल कॉलेज को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। -10 मंजिला मुख्य शैक्षणिक भवन। -200 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल भवन -इमरजेंसी व ट्रॉमा सेंटर (मौजूदा ढांचे के साथ)। -20 बेड का ICU -मॉड्यूलर ओपीडी (8 यूनिट) व सभी विभागों की OPD। -ब्लड बैंक व पोस्टमार्टम हाउस। -ऑडिटोरियम (सभागार) -डॉक्टर, प्रोफेसर और छात्रों के लिए आवासीय परिसर। -मेडिकल एजुकेशन के लिए क्लासरूम और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं। *क्या होगा फायदा ?* -बलिया और आस-पास के जिलों को टर्शरी लेवल (उच्च स्तरीय) इलाज मिलेगा। -MBBS सीटें बढ़ेंगी और स्थानीय छात्रों को फायदा होगा। -गंभीर बीमारियों का इलाज अब जिले में ही संभव होगा। *कब शुरू और कब तक पूरा ?* -अप्रैल 2026 के अंत तक शिलान्यास होने की उम्मीद है। -निर्माण कार्य शुरू होने के बाद सामान्यतः ऐसे प्रोजेक्ट को लगभग 2–3 वर्ष तैयार होने में लगता है। *खास बातें एक नजर में..* नाम: महर्षि भृगु मेडिकल कॉलेज। लागत: 437 करोड़ रुपये। भूमि: 14 एकड़ (जेल परिसर)। अस्पताल : 200 बेड। स्वीकृति: कैबिनेट – अप्रैल 2026। शिलान्यास: जल्द (संभावित अप्रैल अंत)।





