अमृत उजाला
Wednesday, Jul 8, 2026 19:41
Sign In
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
        • लखनऊ
        • आगरा
        • कानपुर
        • अलीगढ
        • वाराणसी
        • मथुरा
        • प्रयागराज
        • मेरठ
        • गोरखपुर
        • बरेली
        • नोएडा
        • अयोध्या
        • गाजियाबाद
        • मुरादाबाद
        • View All Cities
          • आगरा
          • अलीगढ
          • अम्बेडकर नगर
          • अमेठी
          • अमरोहा
          • औरैया
          • अयोध्या
          • आज़मगढ़
          • बागपत
          • बहराइच
          • बलिया
          • बलरामपुर
          • बांदा
          • बाराबंकी
          • बरेली
          • बस्ती
          • भदोही
          • बिजनौर
          • बदायूं
          • बुलंदशहर
          • चंदौली
          • चित्रकूट
          • देवरिया
          • एटा
          • इटावा
          • फर्रुखाबाद
          • फतेहपुर
          • फिरोजाबाद
          • गाजियाबाद
          • ग़ाज़ीपुर
          • गोंडा
          • गोरखपुर
          • हमीरपुर
          • हापुड़
          • हरदोई
          • हाथरस
          • जालौन
          • जौनपुर
          • झांसी
          • कन्नौज
          • कानपुर
          • कासगंज
          • कौशाम्बी
          • खेरी
          • कुशीनगर
          • ललितपुर
          • लखनऊ
          • महाराजगंज
          • महोबा
          • मैनपुरी
          • मथुरा
          • मऊ
          • मेरठ
          • मिर्जापुर
          • मुरादाबाद
          • मुज़फ्फरनगर
          • नोएडा
          • पीलीभीत
          • प्रतापगढ़
          • प्रयागराज
          • रायबरेली
          • रामपुर
          • सहारनपुर
          • सम्भल
          • संत कबीर नगर
          • शाहजहांपुर
          • शामली
          • श्रावस्ती
          • सिद्धार्थनगर
          • सीतापुर
          • सोनभद्र
          • सुल्तानपुर
          • उन्नाव
          • वाराणसी
        • Hide All Cities
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Notification
Font ResizerAa
Advertisement
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • वाराणसी
    • प्रयागराज
    • गोरखपुर
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • आगरा
    • अलीगढ
    • मथुरा
    • मेरठ
    • बरेली
    • अयोध्या
    • मुरादाबाद
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • स्पॉटलाइट
  • राजनीति
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मौसम
  • टेक्नोलॉजी
अमृत उजाला
Wednesday, Jul 8, 2026 19:41
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • वाराणसी
    • प्रयागराज
    • गोरखपुर
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • आगरा
    • अलीगढ
    • मथुरा
    • मेरठ
    • बरेली
    • अयोध्या
    • मुरादाबाद
    • आज़मगढ़
    • अम्बेडकर नगर
    • अमेठी
    • अमरोहा
    • औरैया
    • बागपत
    • बहराइच
    • बलिया
    • बलरामपुर
    • बांदा
    • बाराबंकी
    • बस्ती
    • भदोही
    • बिजनौर
    • बदायूं
    • बुलंदशहर
    • चंदौली
    • चित्रकूट
    • देवरिया
    • एटा
    • इटावा
    • फर्रुखाबाद
    • फतेहपुर
    • फिरोजाबाद
    • गौतम बुद्ध नगर
    • ग़ाज़ीपुर
    • गोंडा
    • हमीरपुर
    • हापुड़
    • हरदोई
    • हाथरस
    • जालौन
    • जौनपुर
    • झांसी
    • कन्नौज
    • कासगंज
    • कौशाम्बी
    • खेरी
    • कुशीनगर
    • ललितपुर
    • महाराजगंज
    • महोबा
    • मैनपुरी
    • मऊ
    • मिर्जापुर
    • मुज़फ्फरनगर
    • पीलीभीत
    • प्रतापगढ़
    • रायबरेली
    • रामपुर
    • सहारनपुर
    • सम्भल
    • संत कबीर नगर
    • शाहजहांपुर
    • शामली
    • श्रावस्ती
    • सिद्धार्थनगर
    • सीतापुर
    • सोनभद्र
    • सुल्तानपुर
    • उन्नाव
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Search
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
        • लखनऊ
        • आगरा
        • कानपुर
        • अलीगढ
        • वाराणसी
        • मथुरा
        • प्रयागराज
        • मेरठ
        • गोरखपुर
        • बरेली
        • नोएडा
        • अयोध्या
        • गाजियाबाद
        • मुरादाबाद
        • View All Cities
          • आगरा
          • अलीगढ
          • अम्बेडकर नगर
          • अमेठी
          • अमरोहा
          • औरैया
          • अयोध्या
          • आज़मगढ़
          • बागपत
          • बहराइच
          • बलिया
          • बलरामपुर
          • बांदा
          • बाराबंकी
          • बरेली
          • बस्ती
          • भदोही
          • बिजनौर
          • बदायूं
          • बुलंदशहर
          • चंदौली
          • चित्रकूट
          • देवरिया
          • एटा
          • इटावा
          • फर्रुखाबाद
          • फतेहपुर
          • फिरोजाबाद
          • गाजियाबाद
          • ग़ाज़ीपुर
          • गोंडा
          • गोरखपुर
          • हमीरपुर
          • हापुड़
          • हरदोई
          • हाथरस
          • जालौन
          • जौनपुर
          • झांसी
          • कन्नौज
          • कानपुर
          • कासगंज
          • कौशाम्बी
          • खेरी
          • कुशीनगर
          • ललितपुर
          • लखनऊ
          • महाराजगंज
          • महोबा
          • मैनपुरी
          • मथुरा
          • मऊ
          • मेरठ
          • मिर्जापुर
          • मुरादाबाद
          • मुज़फ्फरनगर
          • नोएडा
          • पीलीभीत
          • प्रतापगढ़
          • प्रयागराज
          • रायबरेली
          • रामपुर
          • सहारनपुर
          • सम्भल
          • संत कबीर नगर
          • शाहजहांपुर
          • शामली
          • श्रावस्ती
          • सिद्धार्थनगर
          • सीतापुर
          • सोनभद्र
          • सुल्तानपुर
          • उन्नाव
          • वाराणसी
        • Hide All Cities
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2024. All Rights Reserved.
अमृत उजाला > हैल्थ > महर्षि सुश्रुत और भारतीय चिकित्सा का स्वर्णिम अध्याय
हैल्थ

महर्षि सुश्रुत और भारतीय चिकित्सा का स्वर्णिम अध्याय

amritujala
Last updated: June 22, 2026 12:01 pm
amritujala 2 weeks पहले
Share
महर्षि सुश्रुत और भारतीय चिकित्सा का स्वर्णिम अध्याय
महर्षि सुश्रुत और भारतीय चिकित्सा का स्वर्णिम अध्याय
SHARE

महर्षि सुश्रुत का व्यक्तित्व केवल एक चिकित्सक तक सीमित नहीं था अपितु वे प्रयोगधर्मी वैज्ञानिक, कुशल शिक्षाशास्त्री, नैतिक दार्शनिक और समाज सुधारक भी थे। उनकी तात्त्विकता को समझने के लिए सुश्रुत संहिता के मूल पाठ का विश्लेषण आवश्यक है। सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा को अष्टांग आयुर्वेद का प्रमुख अंग माना और स्पष्ट लिखा कि शल्य तंत्र के बिना कोई भी वैद्य पूर्ण नहीं हो सकता क्योंकि आकस्मिक आघात, व्रण, विद्रधि, अर्बुद, अश्मरी, मूढगर्भ जैसी स्थितियों में औषधियाँ निष्फल हो जाती हैं और शस्त्र ही एकमात्र उपाय रह जाता है। उन्होंने शल्य कर्म को प्रधान कर्म कहा और अन्य सभी चिकित्सा पद्धतियों को उसका सहायक बताया।

यह दृष्टिकोण आधुनिक आपातकालीन चिकित्सा और ट्रॉमा केयर के मूल दर्शन से पूर्णतः मेल खाता है। सुश्रुत की विश्लेषणात्मक बुद्धि का प्रमाण उनके रोग वर्गीकरण में मिलता है। उन्होंने रोगों को शारीरिक, मानसिक, आगंतुक, स्वाभाविक, दैवबलप्रवृत्त और कालबलप्रवृत्त वर्गों में बाँटा। यह वर्गीकरण आज के इनफेक्शियस, जेनेटिक, ट्रॉमैटिक, साइकोसोमेटिक, डिजेनरेटिव रोगों के वर्गीकरण के समानांतर है। उन्होंने संक्रमण के सिद्धांत को भी समझा और लिखा कि अदृश्य जीवाणु जिन्हें उन्होंने कृमि कहा है, व्रण को दूषित करते हैं। अतः उन्होंने शस्त्रकर्म से पूर्व यंत्र, शस्त्र, वस्त्र और कर्मागार को धूपन, क्वाथ और अग्नि से शुद्ध करने का निर्देश दिया। यह एंटीसेप्सिस और एसेप्सिस का आद्यतम उल्लेख है जो लुई पाश्चर और जोसेफ लिस्टर से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व का है।

सुश्रुत की उपकरण निर्माण तकनीक भी विलक्षण थी। उन्होंने एक सौ एक यंत्र और बीस शस्त्रों का वर्णन किया। यंत्रों में स्वस्तिक यंत्र, संदंश यंत्र, तालयंत्र, नाडीयंत्र, शलाका यंत्र प्रमुख हैं। शस्त्रों में मंडलाग्र, करपत्र, वृद्धिपत्र, नखशस्त्र, उत्पलपत्र, अर्धधार, सुई, कूर्च, खरपत्र आदि सम्मिलित हैं। प्रत्येक शस्त्र की लंबाई, चौड़ाई, धार, मूठ का मानक निर्धारित था। उन्होंने कहा कि शस्त्र सुप्रहार, सुग्रह, सुदृश्य और सुग्रहित होने चाहिए। शस्त्रों को क्षार, जल और शिला पर धार देकर तेज किया जाता था और पायस, अग्नि तथा समय से उनकी परीक्षा की जाती थी। यह आधुनिक सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट स्टैंडर्डाइजेशन का पूर्वरूप है। शव विच्छेदन की उनकी विधि को जलशोधन कहते थे। शव को नदी में सात दिन तक रखा जाता था, फिर कुशा से रगड़कर परत दर परत अंगों का अध्ययन किया जाता था। इस विधि से उन्होंने त्वचा की सात परतों का वर्णन किया जो आधुनिक डर्मेटोलॉजी में एपिडर्मिस और डर्मिस की परतों से तुलनीय है।

उन्होंने मर्म बिंदुओं को पाँच वर्गों में बाँटा। सद्यः प्राणहर मर्म पर आघात से तत्काल मृत्यु, कालांतर प्राणहर से कुछ समय बाद मृत्यु, विशल्यघ्न मर्म में शल्य रहने तक जीवन, वैकल्यकर मर्म से विकलांगता और रुजाकर मर्म से पीड़ा होती है। यह वर्गीकरण ट्रॉमा स्कोरिंग और वाइटल ऑर्गन प्रोटेक्शन के सिद्धांतों का आधार है।

सुश्रुत की प्लास्टिक सर्जरी की तकनीक का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि वे ग्राफ्ट वायबिलिटी, वैस्कुलैरिटी और इन्फेक्शन कंट्रोल के सिद्धांतों को जानते थे। ललाट से चर्मपट्ट लेते समय उन्होंने वृंत को अक्षुण्ण रखने का निर्देश दिया जिससे रक्त आपूर्ति बनी रहे। इसे आज पेडिकल फ्लैप कहते हैं। नासापुट निर्माण के लिए उन्होंने नलिका का प्रयोग बताया जिससे श्वास बाधित न हो। यह स्टेंटिंग का प्रारंभिक रूप है।

उन्होंने ओष्ठसंधान, कर्णसंधान, लिंगदोष सर्जरी, उदर भेदन, आंत्र सीवन, अर्श शल्य, भगंदर शल्य जैसी जटिल प्रक्रियाएँ भी लिखी हैं। प्रसूति विज्ञान में उन्होंने मूढगर्भ की आठ स्थितियाँ बताईं और शस्त्र द्वारा गर्भ निकालने, मृत गर्भ को खंड खंड करके निकालने की विधियाँ दीं। यह सीजेरियन और डिस्ट्रक्टिव ऑपरेशन्स का आदि रूप है।

सुश्रुत ने एनेस्थीसिया के लिए मद्य, भांग, अहिफेन और संज्ञाहरण औषधियों का प्रयोग बताया। शल्य कर्म से पूर्व रोगी को यवागू, मद्य और मांसरस देकर संज्ञाशून्य किया जाता था। यह प्री-ऑपरेटिव सेडेशन का प्रमाण है। पोस्ट ऑपरेटिव केयर में उन्होंने व्रण धूपन, लेप, बंधन, धावन, रोपण, उत्सादन, अवसादन की छः अवस्थाएँ बताईं। यह घाव प्रबंधन का वैज्ञानिक प्रोटोकॉल है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सुश्रुत का योगदान क्रांतिकारी था।

उन्होंने अधीत विद्या को क्रियावान बनाने पर बल दिया। उनका कथन है कि शास्त्र ज्ञान और शस्त्र कर्म दोनों में निपुण वैद्य ही सिद्ध होता है। उन्होंने गुरु शिष्य परंपरा के लिए आचार संहिता बनाई। दीक्षांत के समय शिष्य से शपथ ली जाती थी कि वह ब्राह्मण, गुरु, दरिद्र, मित्र, संन्यासी, अनाथ और दूर से आए रोगियों की निःशुल्क चिकित्सा करेगा, रोगी के घर की बातें गुप्त रखेगा, स्त्री रोगियों के साथ एकांत में नहीं मिलेगा और अपने लाभ के लिए रोगी को हानि नहीं पहुँचाएगा। यह हिप्पोक्रेटिक ओथ से सदियों पुरानी और अधिक व्यापक चिकित्सा आचार संहिता है।

सुश्रुत के ज्ञान का प्रसार ऐतिहासिक तथ्य है। आठवीं शताब्दी में बगदाद के खलीफा हारून अल रशीद के दरबार में भारतीय वैद्य मंक ने सुश्रुत संहिता का अनुवाद किया। इब्न सिना ने अपनी किताब अल कानून में सुश्रुत का उल्लेख किया। अल रजी ने भी सुश्रुत की औषधियों का प्रयोग किया। तेरहवीं शताब्दी में इटली के ब्रांका परिवार ने सुश्रुत की नासासंधान विधि सीखी। पंद्रहवीं शताब्दी में सिसिली के डॉक्टरों ने इसे अपनाया। सत्रह सौ बानवे में ब्रिटिश सर्जन थॉमस क्रूसो और जेम्स फिंडले ने पुणे में कुम्हार द्वारा की गई नाक की सर्जरी देखी और जेंटलमैन्स मैगजीन में प्रकाशित किया। इससे प्रेरित होकर जोसेफ कार्प्यू ने अठारह सौ सोलह में इंग्लैंड में पहली इंडियन मेथड राइनोप्लास्टी की।

इस प्रकार सुश्रुत की तकनीक ने यूरोप में आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी को जन्म दिया। रॉयल कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स ऑफ़ एडिनबर्ग द्वारा प्रतिमा स्थापना इस ऐतिहासिक ऋण की औपचारिक स्वीकृति है। यह स्वीकारोक्ति बताती है कि विज्ञान किसी एक देश या काल की बपौती नहीं है अपितु मानवता की साझी धरोहर है। सुश्रुत का विश्लेषण करने पर हम पाते हैं कि उन्होंने धर्म, दर्शन और विज्ञान का समन्वय किया। उनके लिए शरीर पंचमहाभूतों का संघात था और शल्य कर्म उस संघात में उत्पन्न विकृति को दूर करने का पुरुषार्थ था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रत्यक्ष, अनुमान और आप्तोपदेश तीनों प्रमाणों से ही सत्य का ज्ञान होता है। यह वैज्ञानिक पद्धति का मूल मंत्र है। इसलिए सुश्रुत को पढ़ना केवल इतिहास पढ़ना नहीं है अपितु भविष्य के चिकित्सा विज्ञान की नींव को समझना है। जब आज रोबोटिक सर्जरी, माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी, ट्रांसप्लांट सर्जरी हो रही है तब भी सुश्रुत के मूल सिद्धांत ज्यों के त्यों लागू होते हैं। इसी कारण वे कालजयी हैं और सम्पूर्ण विश्व के गुरु हैं।

डाक्टर दीपक गोस्वामी
मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक

देश के चर्चित लेखक,मोटिवेशनल स्पीकर, ट्रेनर,समाजिक कार्यकर्ता है।

You Might Also Like

वन राज्यमंत्री ने बच्चों को पिलाई पोलियो की खुराक

सुल्तानपुर में 28 जून को हृदय रोग एवं उच्च रक्तचाप पर राष्ट्रीय सेमिनार

कोविड-19 उत्पत्ति विवाद और वैश्विक असर पर नई बहस

हुगली की लहरों पर योग का इतिहास रचेगा कोलकाता

कैसे कटेगी सिगरी रात, बलम तुम हुक्का छोड़ो

TAGGED:shushrutsurgery
Previous Article भरत तिवारी मामला: मौत, सवाल और जवाब तलाशता लोकतंत्र
Next Article उन्नाव में अधूरे पुल निर्माण पर मानसून का खतरा उन्नाव में अधूरे पुल निर्माण पर मानसून का खतरा

ताजा खबरें

शिक्षकों को मिले मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा कार्ड

4 hours पहले

टॉक्सिक’ का पहला गाना ‘तबाही’ रिलीज

4 hours पहले

IND vs ENG: चौथे टी20 में टीम इंडिया में बदलाव के संकेत

4 hours पहले

पुणे में निर्माणाधीन इमारत का हिस्सा ढहा

4 hours पहले

अम्बेडकरनगर में स्कूल चलो अभियान का भव्य आगाज़

4 hours पहले

पेड़ काटने से भड़का किसान

4 hours पहले

प्रधानाचार्य संजीव चतुर्वेदी को मिला मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का कार्ड

4 hours पहले

मुख्यमंत्री 10 जुलाई को फिर आएंगे अयोध्या, सोहावल में प्रतिमा का करेंगे अनावरण

4 hours पहले

अयोध्या: 204 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का आरोप

4 hours पहले

नाले में पड़ा मिला युवक का शव, दो दिन पहले लौटा था गांव

4 hours पहले
Advertisement

Get Connected with us on social networks

X-twitter Threads

Popular Categories

  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी

Download APP

  • Advertise with us
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Disclaimer
  • Contact us
आभार एवं धन्यवाद!
अमृत उजाला डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के सफल शुभारंभ के अवसर पर मैं उन सभी सम्मानित अतिथियों, शुभचिंतकों, सहयोगियों, पत्रकार साथियों, विज्ञापनदाताओं एवं पाठकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने अपने स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं से हमें प्रेरित किया।

आपके सहयोग और समर्थन ने हमारे इस नए प्रयास को शक्ति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि हम निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को सबसे पहले और सबसे बेहतर तरीके से आप तक पहुँचाते रहेंगे।

आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।

सादर,
डॉ. अखंड प्रताप सिंह
एडिटर इन चीफ एवं सीईओ
अमृत उजाला डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क
“अब सच की रोशनी, हर जिले में”

डॉ. अखंड प्रताप सिंह

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?