नई दिल्ली। योरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। स्पेन और फ्रांस में हीटवेव के कारण 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई देशों में बिजली आपूर्ति, पेयजल व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव देखा जा रहा है। लगातार बढ़ते तापमान ने सामान्य जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि 21 जून के बाद से पूरे यूरोप में गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने चेतावनी दी कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है और यहां तापमान वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है।
भीषण गर्मी के चलते कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। रात के समय भी पर्याप्त राहत नहीं मिलने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर स्कूल बंद करने पड़े हैं, पानी की कमी बढ़ गई है और बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। सोशल मीडिया पर तेज धूप में पैन पर अंडे और बेकन पकने जैसे वीडियो भी वायरल हो रहे हैं।
फ्रांस इस हीटवेव से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। AFP के मुताबिक, मई और जून में लंबे समय तक चली भीषण गर्मी के कारण कम से कम 1,000 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि तापमान में कुछ गिरावट आई है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में यह अभी भी 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने सप्ताहांत और अगले सप्ताह फिर से तापमान बढ़ने की संभावना जताई है।
वहीं, यूनाइटेड किंगडम में भी हाल ही में जून महीने का नया तापमान रिकॉर्ड दर्ज किया गया। BBC के अनुसार, नॉरफ़ॉक के लिंगवुड में 37.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जिसने 1957 और 1976 के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस लंबे और तीव्र गर्मी के पीछे “ओमेगा ब्लॉक” मौसम प्रणाली प्रमुख कारण है। इस स्थिति में उच्च दबाव का एक बड़ा क्षेत्र दो निम्न दबाव वाले क्षेत्रों के बीच फंस जाता है, जिससे आसमान साफ रहता है और कई दिनों तक तेज धूप व अत्यधिक गर्मी बनी रहती है।
स्पेन में स्थिति और भी गंभीर रही। कार्लोस III हेल्थ इंस्टीट्यूट के अनुसार, पिछले सप्ताह हीटवेव के दौरान कम से कम 1,028 लोगों की मौत हुई। राष्ट्रीय मौसम एजेंसी Aemet के मुताबिक, यह संख्या जून 2025 में दर्ज 407 मौतों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। एजेंसी ने यह भी बताया कि जून 2025 रिकॉर्ड में दर्ज स्पेन का सबसे गर्म जून महीना रहा था।








