नई दिल्ली। ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता के अगले चरण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ ने स्पष्ट कहा है कि जब तक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत किए गए प्रमुख वादे, विशेष रूप से लेबनान में युद्ध समाप्त कराने की गारंटी, पूरी नहीं होती, तब तक तेहरान आगे की वार्ता नहीं करेगा।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, घालीबाफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि ईरान के परमाणु अधिकार और उसकी राष्ट्रीय ‘रेड लाइन्स’ किसी भी कीमत पर समझौते का हिस्सा नहीं बन सकतीं। उन्होंने दोहराया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में संचालित हो रहा है।
घालीबाफ ने कहा कि यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) ईरान का वैध अधिकार है और इस पर किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक, ये अधिकार देश की सुरक्षा और बाहरी दबावों के खिलाफ उसकी रणनीतिक शक्ति का हिस्सा हैं।
उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का हवाला देते हुए कहा कि उस समझौते के अनुभव ने साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय गारंटी भी हमेशा प्रभावी नहीं होती। इसी वजह से ईरान अब केवल लिखित आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर वादों के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दे रहा है।
घालीबाफ ने दावा किया कि अमेरिका ने MoU के तहत लेबनान में युद्ध समाप्त कराने, सैन्य कार्रवाई रोकने, विस्थापित लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने और लेबनान की संप्रभुता बनाए रखने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि इन शर्तों को पूरी तरह लागू किए बिना ईरान समझौते के अगले चरण में आगे नहीं बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद करता है कि अमेरिका भी समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करेगा।
घालीबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान बातचीत का रास्ता खुला रखे हुए है, लेकिन यदि अमेरिका अपने वादे पूरे नहीं करता, तो तेहरान हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति भी काम कर रही है और लेबनान से जुड़ी प्रमुख शर्तें पूरी होने तक आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जाएगी।








