गाजीपुर। वर्ष 1990 के बहुचर्चित देवकली पंप कैनाल लूटकांड मामले में गाजीपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने नौ गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया।
यह मामला 3 दिसंबर 1990 का है। अभियोजन के अनुसार, सैदपुर थाना क्षेत्र में देवकली (धरम्मरपुर) पंप कैनाल के निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार सरफराज अंसारी मौके पर मौजूद थे। आरोप था कि उसी दौरान बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह, विजयनारायण सिंह समेत अन्य लोग हथियारों के साथ वहां पहुंचे। आरोपियों ने कथित रूप से फायरिंग कर दहशत फैलाई, मारपीट की और मौके पर खड़े ट्रक के टायर में गोली मारकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के दौरान ठेकेदार और कर्मचारी जान बचाकर वहां से भाग निकले थे।
इस मामले में कुल तीन मुख्य आरोपी थे। इनमें त्रिभुवन सिंह और विजयनारायण सिंह से संबंधित प्रकरण अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि बृजेश सिंह की फाइल अलग कर सीजेएम कोर्ट में सुनवाई की जा रही थी।
बृजेश सिंह के अधिवक्ता सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में नौ गवाहों की गवाही के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया और साक्ष्य पर्याप्त न पाए जाने पर बृजेश सिंह को बरी कर दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद बृजेश सिंह ने इसे न्यायपालिका पर विश्वास की जीत बताया।







