डेढ़ किलोमीटर आगे तक ही पहुंचता है नहर का पानी, ठेकहा, बड़गावां और इसरौलिया के सैकड़ों किसान सिंचाई से वंचित; 100 मीटर सीसी लाइनिंग कराने की मांग
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के किसानों के लिए केराडीह माइनर सिंचाई की सुविधा देने के बजाय परेशानी का सबब बन गई है। धान और गेहूं की खेती के सीजन में हर बार नहर की पटरी टूटने से पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता। विभाग की ओर से बार-बार कराई जाने वाली अस्थायी मरम्मत भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन पा रही है। इससे नाराज किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को सिंचाई विभाग के खिलाफ आवाज उठाते हुए माइनर की पटरी की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की।
लेफ्ट कर्मनाशा कैनाल से निकलने वाली केराडीह माइनर पचवनियां हेड से शुरू होती है। किसानों के अनुसार हेड से करीब 400 से 500 मीटर आगे पूरब दिशा में माइनर की दक्षिणी पटरी प्रत्येक सिंचाई सीजन में टूट जाती है। सिंचाई विभाग की ओर से मिट्टी डालकर अस्थायी मरम्मत करा दी जाती है, लेकिन नहर में दो दिन पानी चलने के बाद दबाव बढ़ते ही पटरी फिर टूट जाती है। इससे नहर का पानी आगे नहीं बढ़ पाता और सिंचाई की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को निराश होना पड़ता है।
किसानों का कहना है कि माइनर का पानी महज डेढ़ किलोमीटर आगे तक ही पहुंच पाता है। इसके चलते ठेकहा, बड़गावां और इसरौलिया गांवों के सैकड़ों किसान सिंचाई सुविधा से वंचित रह जाते हैं। धान और गेहूं की फसलों के लिए समय पर पानी नहीं मिलने से उन्हें निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ जाती है।
किसानों ने सिंचाई विभाग से माइनर की कमजोर पटरी पर करीब 100 मीटर तक सीसी लाइनिंग कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार मिट्टी डालकर मरम्मत कराने पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद समस्या बनी रहती है। यदि प्रभावित हिस्से में सीसी लाइनिंग करा दी जाए तो पटरी टूटने की समस्या से स्थायी राहत मिल सकती है और अंतिम छोर तक पानी पहुंचने का रास्ता साफ होगा।





















