लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान
अंतरमंडलीय स्थानांतरण, पदोन्नति, भत्तों में बढ़ोतरी समेत छह प्रमुख मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज; ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार की भी चेतावनी
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने अपनी लंबित मांगों के समाधान को लेकर आंदोलन की घोषणा कर दी है। संघ की उपशाखा नवाबगंज, बाराबंकी ने राजस्व परिषद की अध्यक्ष के नाम उपजिलाधिकारी नवाबगंज के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि 5 अगस्त 2026 तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के लेखपाल अतिरिक्त हल्कों का कार्य बंद कर देंगे।
संघ का कहना है कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की रीढ़ हैं, लेकिन बढ़ते कार्यभार, संसाधनों की कमी, वर्षों से लंबित पदोन्नति, वेतन एवं भत्तों की विसंगतियां तथा अवकाश के दिनों में भी ड्यूटी जैसी समस्याओं के बावजूद उनकी मांगों पर शासन स्तर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
छह प्रमुख मांगें
ज्ञापन में लेखपाल संघ ने निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से उठाई हैं—
- अंतरमंडलीय स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोला जाए।
- चयन वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची तत्काल जारी की जाए।
- चयन वर्ष 2024 की विभागीय परीक्षा का परिणाम एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र घोषित किए जाएं।
- स्टेशनरी, वाहन एवं विशेष भत्तों में बढ़ोतरी की जाए।
- भूलेख कार्यालयों एवं अन्य पटलों से संबद्ध लेखपालों को मुक्त किया जाए।
- आधारभूत सुविधाओं के अभाव में ग्राम सचिवालयों में लगाए जा रहे रोस्टर को समाप्त किया जाए।
संघ के अनुसार वर्तमान में करीब 2,700 लेखपाल अपने गृह मंडल से 400 से 800 किलोमीटर दूर तैनात हैं, जबकि कई विभागीय प्रक्रियाएं लंबे समय से लंबित पड़ी हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
5 अगस्त से आंदोलन का पहला चरण
संघ ने स्पष्ट किया है कि 5 अगस्त से सभी लेखपाल केवल अपने मूल हल्के में ही कार्य करेंगे। अतिरिक्त हल्कों से संबंधित फाइलें संबंधित तहसील या राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा कर दी जाएंगी।
यदि इसके बाद भी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी स्तर पर ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार का भी निर्णय लागू किया जाएगा।
संघ ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्याओं की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करना है। हालांकि, आंदोलन के कारण यदि राजस्व कार्य या जनसेवा प्रभावित होती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी।







