शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
उन्नाव। गंगा की बाढ़ और कटान से क्षतिग्रस्त हुए कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग को सुरक्षित करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने करीब 17 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। एचबीटीआई कानपुर के इंजीनियरों की संस्तुति के आधार पर मार्ग के किनारे बोल्डर पिचिंग कर कटान रोकने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
उन्नाव-हरदोई मार्ग को कालीमिट्टी, फतेहपुर चौरासी होते हुए कानपुर के शिवराजपुर से जोड़ने वाली 14.6 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण जून 2025 में पूरा हुआ था। लेकिन अगस्त 2025 में गंगा में आई बाढ़ और तेज कटान से सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया, जिसके बाद भारी वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया। पीडब्ल्यूडी द्वारा ईंटों से भरी बोरियों के जरिए कटान रोकने का प्रयास भी सफल नहीं हो सका।
मार्ग को स्थायी रूप से सुरक्षित करने के लिए पीडब्ल्यूडी ने एचबीटीआई कानपुर के विशेषज्ञों से तकनीकी सहायता मांगी थी। 16 जून को प्रोफेसर प्रदीप त्रिपाठी के नेतृत्व में इंजीनियरों की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में कटान रोकने के लिए बोल्डर पिचिंग की संस्तुति की गई है, जिस पर लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
गंगा की बदली धारा बनी कटान की वजह
इंजीनियरों की रिपोर्ट के अनुसार बद्रीपुरवा के पास गंगा की धारा उन्नाव की ओर मुड़ गई है और कई स्थानों पर मुख्य धारा दो हिस्सों में बंट गई है। ग्रामीणों ने भी बताया कि नदी में रेत के टीले बनने से पानी का बहाव बदल गया है, जिससे सड़क के पास कटान बढ़ गया।
रिपोर्ट में करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में ड्रेजिंग कर नदी में जमी रेत हटाने की भी सिफारिश की गई है, ताकि गंगा का प्रवाह अपनी पुरानी धारा में लौट सके। यह कार्य सिंचाई विभाग द्वारा कराया जाएगा।
40 गांवों के लिए अहम है यह मार्ग
कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग से करीब 40 गांवों की लगभग दो लाख आबादी आवागमन करती है। यह सड़क कानपुर, उन्नाव, बांगरमऊ, चकलवंशी, लखनऊ, हरदोई और कन्नौज की ओर जाने वाले लोगों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है।
एक साल में बह गई 27 करोड़ की सड़क
इस सड़क के चौड़ीकरण और नवीनीकरण पर वर्ष 2023 में 27 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। करीब एक वर्ष में निर्माण पूरा होने के बाद 16 जून 2025 को सड़क यातायात के लिए खोली गई थी, लेकिन दो माह बाद आई बाढ़ में इसका बड़ा हिस्सा कटान की भेंट चढ़ गया।
क्या है बोल्डर पिचिंग?
पीडब्ल्यूडी के अनुसार बोल्डर पिचिंग तकनीक में 300 से 600 मिमी आकार के बड़े पत्थरों को व्यवस्थित ढंग से किनारों पर बिछाया जाता है। इनके नीचे रेत या बजरी की फिल्टर लेयर डाली जाती है, जिससे तेज बहाव के दौरान मिट्टी का कटाव रुकता है और सड़क सुरक्षित रहती है।








