अमृत उजाला
Sign In
मंगलवार, जून 2, 2026
  • ट्रेंडिंग
  • फोटो
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मौसम
  • राजनीति
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • एजुकेशन/करियर
Reading: वयं परिवर्तनशीलम्: परिवर्तन की शाश्वत कथा
Share
Notification
Font ResizerAa
अमृत उजाला
  • वेब स्टोरीज
  • धर्म
  • उत्तर प्रदेश
  • Uncategorized
  • उत्तराखण्ड
  • राजनीति
  • Breaking News
  • स्वास्थ्य
  • विदेश
  • एजुकेशन/करियर
  • अपराध
Search
  • होम
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मौसम
  • राजनीति
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • एजुकेशन/करियर
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2024. All Rights Reserved.
अमृत उजाला > Uncategorized > वयं परिवर्तनशीलम्: परिवर्तन की शाश्वत कथा
Uncategorized

वयं परिवर्तनशीलम्: परिवर्तन की शाश्वत कथा

amritujala
Last updated: मई 6, 2026 5:57 पूर्वाह्न
amritujala 4 सप्ताह पहले
Share
SHARE


डाक्टर दीपक गोस्वामी

परिवर्तनशीलता केवल ब्रह्मांड का नियम नहीं, मनुष्य का स्वभाव भी है। “वयं परिवर्तनशीलम्” का अर्थ है – हम बदलने वाले हैं। और यह बदलाव ही हमें जीवित रखता है।

1. दार्शनिक आधार: स्थिरता एक भ्रम है
बुद्ध ने कहा “सब्बे संखारा अनिच्चा” – सभी संस्कार अनित्य हैं। हेराक्लिटस ने 2500 साल पहले कहा था कि तुम एक ही नदी में दो बार नहीं उतर सकते। नदी का जल बदल चुका होता है, और तुम भी। गीता में कृष्ण परिवर्तन को सृष्टि का स्वभाव बताते हैं: जो आज है वह कल नहीं रहेगा। स्थिर दिखने वाला हिमालय भी हर साल कुछ मिलीमीटर बढ़ रहा है। स्थिरता हमारी आँखों का धोखा है, परिवर्तन ही एकमात्र सत्य।

2. जैविक सत्य: बदलना ही जीवन है
तुम्हारे शरीर की 330 अरब कोशिकाएँ हर दिन बदल जाती हैं। 7 से 10 साल में तुम्हारा पूरा शरीर नए अणुओं से बन जाता है। जिस त्वचा से तुमने कल किसी को छुआ था, वह आज तुम्हारे पास नहीं है। DNA वही है, पर उसका प्रकट होना हर पल परिस्थिति के हिसाब से बदलता है। जो कोशिका बदलना बंद कर दे, उसे हम कैंसर कहते हैं। जो जीव बदलना बंद कर दे, वह विलुप्त हो जाता है। विकासवाद का पूरा सिद्धांत इसी पर टिका है – Adapt or Perish.

3. मनोवैज्ञानिक पक्ष: हम एक नहीं, अनेक हैं
विलियम जेम्स ने कहा था कि मनुष्य के कई “सामाजिक स्व” होते हैं। ऑफिस में तुम अलग हो, दोस्तों के साथ अलग, माँ-बाप के सामने अलग। उम्र के साथ हमारे मूल्य, डर, सपने सब बदलते हैं। 15 साल की उम्र में जो गाना तुम्हारी जान था, 30 में शायद तुम्हें बचकाना लगे। इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहते हैं – अनुभव के साथ मस्तिष्क खुद को पुनर्गठित करता रहता है। स्मृतियाँ भी स्थिर नहीं। हर बार याद करने पर हम उन्हें थोड़ा बदल देते हैं। इसलिए हमारा अतीत भी परिवर्तनशील है।

4. सामाजिक परिवर्तन: पहचान तरल है
100 साल पहले “भारतीय” होने का अर्थ अलग था, आज अलग है। जाति, धर्म, राष्ट्र, लिंग – जिन पहचानों को हम स्थायी मानते हैं, इतिहास बताता है कि वे सब बदली हैं। भाषाएँ मरती हैं और नई जन्म लेती हैं। संस्कृति कोई संग्रहालय में रखी चीज नहीं, बहती नदी है। सोशल मीडिया ने तो पहचान को और तरल बना दिया। हम हर दिन खुद का नया संस्करण प्रस्तुत करते हैं। पुरानी पीढ़ी इसे “दिखावा” कहती है, पर मनोविज्ञान इसे “Exploration of Self” मानता है।

5. तकनीक और परिवर्तन की गति
पहले बदलाव पीढ़ियों में दिखते थे। खेती से उद्योग तक आने में हजारों साल लगे। उद्योग से सूचना युग में आने में 200 साल। और अब इंटरनेट से AI तक केवल 30 साल। तुम्हारे दादा ने जो दुनिया देखी, तुम्हारे पिता ने उससे अलग देखी, और तुम तीसरी दुनिया देख रहे हो। कल की नौकरियाँ आज नहीं हैं, आज की कल नहीं रहेंगी। जो कौशल सबसे जरूरी है वह है “Learn, Unlearn, Relearn”। स्थिर नौकरी का युग खत्म हुआ, अब स्थिर “कौशल” भी नहीं रहा।

6. परिवर्तन का दुख और आनंद
बदलाव तकलीफ देता है क्योंकि हमारा मस्तिष्क परिचित को सुरक्षित मानता है। इसी को “Status Quo Bias” कहते हैं। रिश्ता टूटना, शहर बदलना, नौकरी जाना – सब दुख देता है। पर यही बदलाव हमें बढ़ाता भी है। पुरानी त्वचा उतारे बिना साँप बड़ा नहीं हो सकता। हर दुख के बाद हम थोड़े अलग इंसान होते हैं – ज्यादा मजबूत, या ज्यादा सतर्क। नीत्शे का वाक्य यहाँ सही बैठता है: जो तुम्हें मारता नहीं, वह तुम्हें मजबूत बनाता है।

7. क्या कुछ अपरिवर्तनीय भी है?
अगर सब बदलता है तो “मैं” कौन हूँ? अद्वैत वेदांत कहता है कि परिवर्तन के पीछे एक अपरिवर्तनीय साक्षी है – चेतना। बौद्ध कहते हैं कि कोई स्थायी “आत्मा” नहीं, केवल परिवर्तन की धारा है, जैसे दीपक की लौ। आधुनिक विज्ञान कहता है कि पैटर्न रहता है, पदार्थ बदलता है। जैसे भँवर – पानी हर सेकंड नया, पर भँवर का आकार वही। शायद हमारा “स्व” भी ऐसा ही भँवर है। निरंतर बदलते अनुभवों का एक पैटर्न जिसे हम नाम दे देते हैं।

8. परिवर्तनशीलम् को अपनाना: जीवन की कला
अगर बदलाव अटल है तो उससे लड़ना व्यर्थ है। स्टोइक दर्शन कहता है: जो तुम्हारे वश में नहीं उसे स्वीकार करो, जो वश में है उस पर काम करो। तुम मौसम नहीं बदल सकते, छाता ले जा सकते हो। पुराना चला गया, उस पर रोने से बेहतर है नए के लिए जगह बनाना। जापानी “वाबी-साबी” इसी को सुंदर मानता है – अपूर्णता, अस्थायित्व, अधूरेपन में सौंदर्य देखना। टूटी हुई प्याली को सोने से जोड़ने की कला “किंत्सुगी” हमें सिखाती है कि टूटना भी सुंदर हो सकता है।

निष्कर्ष: बहाव में तैरना सीखो
वयं परिवर्तनशीलम् कोई शाप नहीं, वरदान है। बोरियत से बचने का, गलतियों से सीखने का, बेहतर होने का मौका। पेड़ अपनी जगह स्थिर है इसलिए आँधी में टूट जाता है। घास लचक जाती है और फिर खड़ी हो जाती है।

तो अगली बार जब लगे कि सब बदल रहा है, घबराना मत। याद रखना कि तुम खुद परिवर्तन हो। तुम कल वाले नहीं रहे, और कल तुम आज वाले नहीं रहोगे। यही तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत है।

बदलते रहो, बहते रहो। यही जीवन है।

You Might Also Like

माता पिता हैं हमारी सच्ची खुशियों के बागवान

धर्मयुद्ध की चंडी-राजमाता अहिल्या बाई होल्कर

अम्मुकेयर चैरिटेबल ट्रस्ट 1 जून को नासिक में शुरू करेगा छठा मोहनजी अन्नक्षेत्र, देशभर में चला रहा व्यापक जनकल्याण अभियान

प्रमाणित आँकड़ों की कसौटी पर हिंदी पत्रकारिता का यथार्थ

हिंदी पत्रकारिता के लिए गर्व का दिन है 30 मई

Share This Article
Facebook Twitter Email Print
Previous Article शिक्षामित्र सम्मान समारोह में बढ़े मानदेय की घोषणा, 10 हजार से बढ़कर 18 हजार हुआ भुगतान
Next Article चलो अच्छा हुआ कम्युनिस्टों की विदाई तो हुई

ताजा खबरें

अयोध्या: नगर निगम जोनल कार्यालय पर पार्षदों का धरना, बोले— समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन रहेगा जारी

2 घंटे पहले

उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 में कठोर संशोधन की आवश्यकता

3 घंटे पहले

बृहस्पति ग्रह का 12 वर्ष बाद उच्च राशि कर्क में गोचर आज से

3 घंटे पहले

अयोध्या के आचारी मंदिर में इतिहास का खजाना! मिलीं 400 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां

1 दिन पहले

माता पिता हैं हमारी सच्ची खुशियों के बागवान

1 दिन पहले

एमएलसी स्नातक चुनाव को लेकर राम उपाध्याय का अयोध्या दौरा, जनसंपर्क अभियान तेज

2 दिन पहले

हाथों में झाड़ू, दिल में स्वच्छता का संकल्प: अयोध्या में उतरा जनसैलाब, चला महा स्वच्छता अभियान

2 दिन पहले

धर्मयुद्ध की चंडी-राजमाता अहिल्या बाई होल्कर

2 दिन पहले

युवक की मौत के बाद भड़का जनाक्रोश, कार्रवाई और मुआवजे की मांग पर हाईवे जाम

2 दिन पहले

अम्मुकेयर चैरिटेबल ट्रस्ट 1 जून को नासिक में शुरू करेगा छठा मोहनजी अन्नक्षेत्र, देशभर में चला रहा व्यापक जनकल्याण अभियान

2 दिन पहले

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane

Poppular Categories

  • धर्म
  • उत्तर प्रदेश
  • Uncategorized
  • उत्तराखण्ड
  • राजनीति
  • Breaking News
  • स्वास्थ्य
  • विदेश
  • एजुकेशन/करियर
  • अपराध
  • मनोरंजन
  • खेल
  • देश
  • लखनऊ
  • अन्य खबरें
  • बलरामपुर
  • महाराष्ट्र
  • बिहार
  • जम्मू कश्मीर
  • राजस्थान
  • भोपाल
  • टेक्नोलॉजी
  • पंजाब
  • बिज़नेस
  • कोलकाता
  • आज का राशिफल
  • मौसम

Download APP

Google-play Apple
  • Advertise with us
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Disclaimer
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?